40 फीसदी स्कूलों में नहीं विकसित किए जा रहे हरी सब्जियों के बगीचे
अधिकतर स्कूलों ने कहा- गार्डन के लिए परिसर में नहीं है पर्याप्त जमीन
विभाग की हिदायत, भवन की छत या अन्य तरीकों से उगाएं पोषक सब्जियां
संवाद न्यूज एजेंसी
ऊना। जिला के शत प्रतिशत सरकारी स्कूलों में मिड-डे मील को अधिक पोषक बनाने के मकसद से न्यूट्रिशन गार्डन (पोषण वाटिका) तैयार करने के आदेश दिए हैं। शिक्षा निदेशालय ने इससे जुड़ी एक रिपोर्ट भी मांगी है। इसमें बताना होगा कि कितने स्कूलों में सक्रियता से इस पर काम हो रहा और कहां नहीं। जहां अभी तक कोई कदम नहीं उठाए गए, उसका कारण सहित जवाब देना होगा।
जानकारी के मुताबिक जिले के करीब 40 प्रतिशत स्कूलों में न्यूट्रिशन गार्डन तैयार करने के लिए गंभीरता से कार्य नहीं हो रहा। स्कूल परिसर में कम स्थान होना इसकी वजह बताया जा रहा। वहीं, शिक्षा निदेशालय के जारी निर्देशों में कहा गया है कि सब्जियां तैयार करने के लिए अधिक जमीन की आवश्यकता नहीं है। इसके लिए स्कूल भवन की छतों और छोटे डिब्बे, प्लास्टिक के पॉट्स व बोतल और अन्य वस्तुओं में मिट्टी डालकर उगाया जा सकता है। इसके अलावा ईको क्लब फंड के जरिये पौधे उगाने वाले पोट्स की खरीद कर सकते हैं। निदेशालय की ओर से कहा गया कि मिड-डे मील को बच्चों के स्वास्थ्य के लिहाज से बेहतर करने की जरूरत है। इसके लिए विभिन्न पोषक सब्जियां पालक, धनिया, शलगम, मूली, चुकंदर आदि तैयार कर सकते हैं। इससे मिड-डे मील में पोषक तत्व बढ़ेंगे। विद्यार्थियों के लिए प्रतिदिन तैयार होने वाले मिड-डे मील को पहले से अधिक पौष्टिक बनाने के लिए स्कूलों को पोषण उद्यान तैयार करने के आदेश दिए गए हैं। इसमें विद्यार्थियों के साथ मल्टी टास्क वर्कर, स्कूल प्रबंधन कमेटी सहित अन्य का सहयोग लिया जा सकता है।
उपनिदेशक प्रारंभिक शिक्षा विभाग सोमलाल धीमान ने बताया कि बीते दिनों शिक्षा विभाग की टीम ने सभी स्कूलों का निरीक्षण कर व्यवस्थाएं जांची। कई स्कूलों में अभी पोषण गार्डन तैयार करने में सक्रियता की जरूरत है। जिन स्कूलों ने पर्याप्त स्थान न होना वजह बताई गई, उन्हें निदेशालय की ओर से सुझाए विकल्प को अपनाने को कहा गया। आने वाले समय में दोबारा स्कूलों में जाकर व्यवस्था की जांच होगी।