जब शिक्षक ही नहीं, तो विद्या मंदिरों में विद्यार्थियों को ज्ञान कैसे मिलेगा। जिले के राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक स्कूलों में शिक्षकों के करीब 78 पद खाली चल रहे हैं। इससे छात्रों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है। जबकि, वार्षिक परीक्षाओं को मात्र तीन माह शेष रह गए हैं। लेकिन, शिक्षा विभाग अभी भी छात्रों की पढ़ाई को लेकर गंभीर नहीं दिखाई दे रहा। विभाग की लापरवाही से स्कूलों में पढ़ रहे हजारों बच्चों का भविष्य दांव पर लग सकता है।
जिले के अधिकांश स्कूलों में शिक्षकों के पद खाली होने से स्कूलों में जुगाड़ से काम चलाया जा रहा है। इतना ही नहीं, जिले के 80 प्रतिशत स्कूलों में लिपिकों के पद खाली होने के कारण स्कूलों में शिक्षकों को ही लिपिकों का काम करना पड़ रहा है। स्कूलों में स्टाफ की कमी के चलते मस्ती की पाठशाला का माहौल बना हुआ है। स्कूलों में शिक्षकों की कक्षाएं खाली होने के कारण बच्चे दिन भर खेलकूद कर घर वापस लौट रहे हैं। एक ओर सरकार शिक्षा के बड़े-बड़े दावे कर रही है, लेकिन असल में सरकारी स्कूलों की हालत कुछ और ही बयां करती है।
जिले के अंबेहड़ा स्कूल में अंग्रेजी के प्रवक्ता, पुबोवाल, संघनई, गगरेट में हिंदी प्रवक्ता, भरवाईं, घंगरेट में रानितिक विज्ञान तथा गगरेट, गिंडपुर मलौण, दुलैहड़, धुंदला, बसदेहड़ा, गोंदपुर जयचंद स्कूल में अर्थ शास्त्र के प्रवक्ता, मुबारिकपुर स्कूल में इतिहास, सलोई स्कूल में संस्कृत, बाल स्कूल ऊना में साईकोलॉजी, घानारी स्कूल में जियोग्राफी, गिंडपुर मलौण, सनोली स्कूल में सोशियोलॉजी, दुलहैड़, पुबोवाल, पृथिपुर, बीटन, सनोली, सलोई स्कूल में केमिस्ट्री, दौलतपुर, घनारी, अंब, रिपोह मिसंरा, भंजाल, अंबेहड़ा, बढेड़ा, नेहरियां, पुबोवाल, सलोह, गगरेट, ललड़ी, रायपुर मैदान, टकोली, दियाड़ा, चौकी मन्यार, बुधान, गोंदपुर बनेहड़ा, थानाकलां, जोह, गगरेट, चुरडू, डंगोली, कुनेरन, सनोली, अंब, ठठल, सिंगा, रामगढ़ और बसदेहड़ा स्कूल में कॉमर्स के प्रवक्ताओं की पद खाली पड़े हैं। वहीं धनेत, दुलैहड़, रायपुर मैदान, हरोली, मुबारिकपुर, कुठेड़ा जसवालां, बढ़ेड़ा राजपुतां, सलोई, चलोला, गगरेट, बीटन, पंजावर, बंगाणा, रायंसरी, खड्ड, बाथड़ी, रिपोह मिंसरा, कलरूही तथा संघनई स्कूल में आईपी प्रवक्ता के पद खाली हैं।
उच्च शिक्षा उपनिदेशक भूप सिंह ने कहा कि स्कूलों में खाली पड़े पदों को भरने के लिए विभाग के उच्च अधिकारियों को अवगत करवाया गया है।