हर पंचायत में विशेषज्ञ दल गठित करने की मांग
एसडी शर्मा
मैहतपुर (ऊना)। ग्राम पंचायतों, नगर परिषदों और नगर पालिकाओं में लावारिस कुत्तों के लिए आश्रय गृह नहीं बन पाए हैं। इससे उनकी बढ़ती संख्या लोगों के लिए परेशानी का कारण बन रही है। लावारिस कुत्तों से सड़क हादसों का खतरा बना रहता है, वहीं छोटे बच्चों और बुजुर्गों की सुरक्षा को लेकर भी चिंता बढ़ रही है। इसके बावजूद स्थानीय निकायों में कुत्तों की नसबंदी और एंटी रेबीज टीकाकरण की व्यवस्था प्रभावी ढंग से लागू होती नजर नहीं आ रही है।
लावारिस कुत्तों की आबादी नियंत्रित करने के लिए नसबंदी और एंटी रेबीज टीकाकरण को अहम माना जाता है। इसके लिए पंचायत स्तर पर नियमित अभियान चलाने की जरूरत है। साथ ही, कुत्तों को पकड़ने, उनके उपचार और देखभाल के लिए प्रशिक्षित दलों की व्यवस्था होनी चाहिए। हालांकि, इस दिशा में पंचायतों और संबंधित विभागों की सक्रियता को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
रायपुर सहोड़ा की अनु शर्मा कई वर्षों से लावारिस कुत्तों की नसबंदी और एंटी रेबीज टीकाकरण के लिए प्रयास कर रही हैं। उन्होंने पंचायत स्तर से लेकर जिला प्रशासन और मुख्यमंत्री पोर्टल तक शिकायतें दर्ज करवाई हैं। अनु शर्मा ने मांग की कि प्रत्येक पंचायत और शहरी निकाय में कुत्तों को पकड़ने के लिए विशेषज्ञ दल गठित किए जाएं। ये दल कुत्तों को निर्धारित स्थानों पर ले जाकर उनकी नसबंदी और टीकाकरण में सहयोग करें। उन्होंने कहा कि इस काम में पशुपालन और स्वास्थ्य विभाग को जिम्मेदारी निभानी चाहिए।
लावारिस कुत्तों को पकड़ने के लिए विशेषज्ञ लोगों की जरूरत होती है, लेकिन अभी ऐसी व्यवस्था नहीं है। उन्होंने कहा कि लोगों में जागरूकता की कमी भी समस्या है। इस कार्य को प्रभावी ढंग से पूरा करने के लिए जनसहयोग जरूरी है। - डॉ. वीरेंद्र पटियाल, उप निदेशक पशुपालन विभाग ऊना