पंडोगा शराब फैक्ट्री समेत अन्य उद्योगों में नहीं हुई नियमों की पालना
प्रबंधन ने मांगा दो हफ्ते का समय, 25 सितंबर को होगी अब सुनवाई
प्लांट के एरिया में ग्रीन बेल्ट के तहत नहीं लगाए पौधे
सामुदायिक कल्याण के नाम पर भी नहीं हुआ कोई विकास
पर्यावरण मंत्रालय की कार्य प्रणाली भी सवालों के कटघेरे में
संवाद न्यूज एजेंसी
ऊना। उपमुख्यमंत्री के गृह विधानसभा क्षेत्र स्थित पंडोगा औद्योगिक क्षेत्र में उद्योग स्थापित करने के साथ नियमों के तहत ग्रीन बेल्ट में पौधारोपण किया जाना था। लेकिन, वास्तविकता में क्षेत्र में कहीं भी ऐसा दिखाई नहीं दिया। इस पर एनजीटी ने सख्ती दिखाई है। खुफिया विभाग से सेवानिवृत्त पूर्व सैनिक मनोज कुमार कौशल की शिकायत पर एनजीटी ने कार्रवाई शुरू की है। जांच में पंडोगा स्थित शराब फैक्ट्री में भी गंभीर अनियमितताएं सामने आईं, जिसके बाद केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय से पर्यावरण मंजूरी देने के आधार पर जवाब मांगा गया है। उधर, पंडोगा औद्योगिक क्षेत्र में स्थापित पुराने और नए उद्योगों ने भी अपनी स्थिति स्पष्ट करने के लिए एनजीटी से दो हफ्ते का समय मांगा है। अब मामले की अगली सुनवाई 25 सितंबर को होगी। अपीलकर्ता का आरोप है कि नियमों के तहत कुल प्लांट क्षेत्र के 34% हिस्से में पौधरोपण होना चाहिए था, लेकिन धरातल पर यह व्यवस्था पूरी तरह नदारद है। वहीं, सीईआर फंड के तहत भी सामुदायिक विकास कार्य किए जाने थे, लेकिन अब तक किसी स्कूल या क्षेत्र में ऐसा कोई काम शुरू नहीं हुआ। इससे पर्यावरण मंत्रालय की मंजूरी पर भी सवाल उठ रहे हैं। अपीलकर्ता के अनुसार उद्योग विभाग ने पौधरोपण के लिए 1.93 करोड़ रुपये वन विभाग को दिए थे। वन विभाग की रिपोर्ट में 70 लाख रुपये के पौधे लगाने का दावा है, लेकिन इस में भी फर्जीवाड़ा हुआ है। नाम किसी और का दर्शाकर राशि किसी और के खाते में जमा करवाई गई और जमीन पर पौधरोपण नगण्य ही नजर आता है। एनजीटी ने इस पर गंभीर रुख अपनाते हुए वन विभाग, संबंधित उद्योगों और अन्य विभागों को 25 सितंबर तक स्थिति स्पष्ट करने के निर्देश दिए हैं। इसके बाद ही आगे की कार्रवाई तय होगी।