गृहस्थ जीवन की शुरुआत के लिए शुभ नहीं माना जाता भाद्र माह : कमल
परिवार और सहेलियों के साथ गीत-संगीत, झूले झूलने का मिलता है आनंद : पूजा
संवाद न्यूज एजेंसी
थानाकलां (ऊना)। भाद्र मास शुरू होते ही क्षेत्र में पारंपरिक रिवाजों का पालन आरंभ हो गया है। मान्यता है कि इस महीने में नवविवाहिता अपने ससुराल में नहीं रहतीं और उन्हें मायके भेज दिया जाता है। यह परंपरा आज भी ग्रामीण अंचलों में जीवित है। स्थानीय बुजुर्ग कमल शर्मा बताते हैं कि भाद्र मास को गृहस्थ जीवन की शुरुआत के लिए शुभ नहीं माना जाता। पूर्वजों ने यह नियम बनाए थे कि नवविवाहिता इस अवधि में मायके में ही समय बिताए। उनके अनुसार यह परंपरा बेटियों की सुरक्षा और स्वास्थ्य को ध्यान में रखकर बनाई गई थी। वहीं, हाल ही में विवाहिता पूजा देवी कहती हैं -ससुराल से विदा होकर जब भादों में मायके आती हूं तो परिवार और सहेलियों के साथ गीत-संगीत, झूले और त्योहारों का आनंद मिलता है। यह समय मेरे लिए बेहद खास होता है। भाद्र मास में वर्षा सबसे अधिक होती है। पुराने समय में इसी मौसम में संक्रामक रोग फैलने का खतरा रहता था। ऐसे में नवविवाहिता को मायके भेजने की परंपरा इसलिए बनी ताकि वह ससुराल की जिम्मेदारियों और कठिनाइयों से दूर रहकर सुरक्षित और सहज वातावरण में समय बिता सके। गांवों में आज भी लोकगीतों की पंक्तियां सुनाई देती हैं -भादो आयो मायके भेजो, बेटी रहे सुरक्षित। समाज के जानकारों का मानना है कि यह परंपरा केवल आस्था का प्रतीक नहीं, बल्कि जीवन अनुभव और सामाजिक संरक्षण की एक सुंदर मिसाल भी है।