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झूठ बोलकर स्वार्थ सिद्ध करने की चेष्टा कभी न करें : स्वेमानंद गिरी

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संवाद न्यूज एजेंसी
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बड़ूही (ऊना)। उपमंडल अंब के अंतर्गत गांव नक्की में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के चौथे दिन कथा वाचक पूज्य स्वेमानंद गिरी ने श्रद्धालुओं का मार्गदर्शन किया। कहा कि सभी भक्त पिछले दिनों से चल रहे इस पावन कार्यक्रम में दिए गए उपदेशों को अपने जीवन में व्यावहारिक रूप से अपनाएं।
संत समाज का यही उद्देश्य होता है कि जनमानस को सत्य, सेवा और संयम का मार्ग दिखाया जाए। कहा कि जीवन में कभी भी किसी के साथ अन्याय न करें और न ही झूठ बोलकर किसी प्रकार का स्वार्थ सिद्ध करने की चेष्टा करें। प्रभु की कृपा सदैव उसी पर होती है जो सत्य के मार्ग पर चलकर मानवता की सेवा में समर्पित रहता है। उन्होंने सभी को अपनी दिनचर्या प्रभु के सिमरन से शुरू करने की प्रेरणा दी और कहा कि गांव में हर बार लोक कल्याण के उद्देश्य से जो धार्मिक आयोजन होते हैं, वे अत्यंत सराहनीय हैं। ऐसे आयोजनों से समाज को आध्यात्मिक ज्ञान प्राप्त होता है।
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कथा के दौरान उन्होंने बताया कि राजा परीक्षित को जन्म से पूर्व ही भगवान वासुदेव के दर्शन हुए थे, जिसका उल्लेख श्रीमद्भागवत के प्रथम स्कंध तथा दशम स्कंध के कुछ प्रसंगों में आता है। उन्होंने यह भी बताया कि योग के आठ अंग होते हैं, जिनमें से क्रिया योग का विशेष महत्व है। कार्यक्रम में उपस्थित श्रद्धालुओं ने वेद ग्रंथों के उपदेशों को ध्यानपूर्वक सुना और आत्मसात करने का संकल्प लिया।
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