हरोली/ऊना। उपमुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री ने एसडीआरएफ अधिकारियों से कहा कि युवाओं को आपदा प्रबंधन का प्रशिक्षण देने के साथ उनके प्रशिक्षण प्रमाणपत्रों को उपयोगी बनाने की दिशा में भी काम किया जाए। इसके लिए प्रस्ताव तैयार किया जाए ताकि एसडीआरएफ से प्रशिक्षण प्राप्त करने वाले युवाओं के प्रमाणपत्रों को एनसीसी और एनएसएस की तर्ज पर मान्यता दिलाने की संभावनाएं तलाशी जा सकें। उन्होंने कहा कि आपदा प्रबंधन के प्रति जागरूकता और प्रशिक्षण से अधिक लोगों को आपात परिस्थितियों में प्रभावी ढंग से कार्य करने के लिए तैयार किया जा सकता है। उपमुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री शुक्रवार को पालकवाह स्थित हिमाचल प्रदेश सेंटर ऑफ डिजास्टर प्रिपेयर्डनेस एंड रेजिलिएंस में हिमाचल प्रदेश राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल (एसडीआरएफ) की पहली वार्षिक मीट-2026 में बताैर मुख्य अतिथि बोल रहे थे।
कार्यक्रम के दौरान एसडीआरएफ के इन्वेंट्री मैनेजमेंट सिस्टम और आधिकारिक वेबसाइट का शुभारंभ किया गया। इसके साथ ही मणिमहेश यात्रा के दौरान एसडीआरएफ की गतिविधियों और बचाव कार्यों पर आधारित डॉक्यूमेंट्री का विमोचन भी किया गया। आपदा के दौरान लोगों की जान बचाने और राहत-बचाव अभियानों में एसडीआरएफ की सहायता करने वाले आम नागरिकों को सम्मानित किया गया। कार्यक्रम के दौरान उप मुख्यमंत्री ने एसडीआरएफ की ओर से प्रदर्शित उपकरणों का अवलोकन किया और जवानों एवं प्रशिक्षकों द्वारा प्रस्तुत आपदा बचाव के प्रदर्शन देखे। उन्होंने वार्षिक खेल प्रतियोगिताओं के विजेताओं को पुरस्कार प्रदान किए। रस्साकशी का फाइनल मुकाबला हरोली एसडीआरएफ और शिमला एनडीआरएफ की टीमों के बीच हुआ, जिसमें शिमला की टीम विजेता रही।
कमांडेंट जनरल होमगार्ड, सिविल डिफेंस एवं एसडीआरएफ सतवंत अटवाल ने आपदा तैयारियों के महत्व पर प्रकाश डालते हुए बताया कि प्रदेश में हर वर्ष डेढ़ लाख से अधिक लोगों को आपदा से निपटने के लिए प्रशिक्षित किया जा रहा है। प्रशिक्षण के माध्यम से लोगों को आपात परिस्थितियों में सुरक्षित रहने, बचाव कार्यों में सहयोग करने और आवश्यक कदम उठाने के लिए तैयार किया जा रहा है।