संवाद न्यूज एजेंसी
दौलतपुर चौक (ऊना)। डेरा बाबा हरिशाह अंबोआ दरबार में गद्दीनशीन राकेश शाह के सानिध्य में चल रही 26वीं श्रीमद्गोभागवत कथा के पांचवें दिन मंगलवार को कथावाचक कृष्ण कन्हैया जोशी ने गोवर्धन प्रसंग सुनाया। बाबा राकेश शाह ने कहा कि शास्त्रों में बताया गया है कि गाय उसी प्रकार पवित्र होती है जैसे नदियों में गंगा। गाय को देवी लक्ष्मी का स्वरूप भी कहा गया है। देवी लक्ष्मी सुख समृद्धि देती है। वहीं, गोमाता अपने दूध से स्वास्थ्य रूपी धन प्रदान करती है। गो संपूर्ण मानव जाति के लिए पूजनीय और आदरणीय है। कथाव्यास ने गोवर्धन पूजा प्रसंग सुनाते हुए बताया कि द्वापर युग में जब इंद्रदेव को अपनी शक्ति पर अभिमान हो गया था तब भगवान श्रीकृष्ण ने अभिमान चूर करने के लिए लीला रची। मैया यशोदा इंद्रदेव की पूजा के लिए अन्नकूट की तैयारी कर रही थी। लेकिन, भगवान कृष्ण के कहने पर बृजवासियों और माता यशोदा ने इंद्र की पूजा छोड़कर गोवर्धन पूजा करनी शुरू कर दी। तब इंद्र देव ने रुष्ठ होकर मूसलाधार वर्षा की। भगवान श्रीकृष्ण ने बृजवासियों की रक्षा के लिए लगातार सात दिन तक अपनी सबसे छोटी अंगुली पर गोवर्धन पर्वत को उठा कर रखा। इस पर माता यशोदा ने भगवान को छप्पन प्रकार का भोग लगाया।