ऊना गगरेट सड़क मार्ग के किनारे खतरा बने सूखे पेड़। संवाद
- फोटो : ट्रामा सेंटर में घायल का होता उपचार। संवाद
ऊना। ऊना-गगरेट मार्ग में किनारे करीब 35 किलोमीटर तक सूख चुके पेड़ राहगीरों और वाहन चालकों के लिए बड़ा खतरा बनते जा रहे हैं। घालूवाल से लेकर गगरेट तक सड़क किनारे 50 से अधिक पेड़ पूरी तरह सूख चुके हैं। बारिश और तेज हवाओं के दौरान इन पेड़ों की बड़ी-बड़ी टहनियां कई बार सड़क पर गिर चुकी हैं, जिससे हादसे की आशंका लगातार बनी रहती है। स्थानीय लोगों का कहना है कि समय रहते इन पेड़ों को नहीं हटाया गया तो किसी भी समय बड़ा हादसा हो सकता है।
यह जिला मुख्यालय को गगरेट क्षेत्र से जोड़ने वाला प्रमुख मार्ग है, जहां दिनभर छोटे-बड़े वाहनों की आवाजाही रहती है। बरसात के मौसम में तेज हवाएं चलने पर सूखे पेड़ों की शाखाएं टूटकर सड़क पर गिर जाती हैं। कई बार वाहन चालकों को अचानक ब्रेक लगाने पड़ते हैं जबकि दोपहिया वाहन चालकों के लिए यह स्थिति और अधिक खतरनाक साबित हो सकती है।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि एक ओर हरे-भरे पेड़ों की अवैध कटाई की घटनाएं सामने आती रहती हैं, वहीं पूरी तरह सूख चुके और जानलेवा बन चुके पेड़ों को हटाने के लिए सरकारी प्रक्रिया इतनी लंबी और जटिल है कि वर्षों तक कार्रवाई नहीं हो पाती। विभागीय अनुमति और औपचारिकताओं के कारण सूखे पेड़ सड़क किनारे खड़े रहते हैं और लोगों की सुरक्षा पर खतरा बने रहते हैं। लोगों ने प्रशासन और संबंधित विभागों से मांग की है कि पूरे मार्ग का संयुक्त निरीक्षण कर सूखे और कमजोर पेड़ों की पहचान की जाए तथा उन्हें प्राथमिकता के आधार पर हटाया जाए।
स्थानीय निवासी सतीश कुमार ने कहा कि बरसात और तेज हवाओं के दौरान कई बार सूखे पेड़ों की बड़ी टहनियां सड़क पर गिर चुकी हैं। इससे हर समय हादसे का खतरा बना रहता है। प्रशासन को किसी अप्रिय घटना का इंतजार करने के बजाय तुरंत सूखे पेड़ों को हटाने की कार्रवाई करनी चाहिए।
स्थानीय निवासी जसविंद्र सिंह ने कहा कि हरे पेड़ अवैध रूप से काटे जा रहे हैं जबकि पूरी तरह सूख चुके पेड़ों को हटाने के लिए लोगों को लंबे समय तक सरकारी प्रक्रिया का इंतजार करना पड़ता है। सरकार को ऐसी व्यवस्था बनानी चाहिए कि लोगों की जान को खतरा बनने वाले पेड़ों को जल्द से जल्द हटाया जा सके।