ऊना। परमात्मा की भक्ति को प्राप्त कर मनुष्य सिद्ध हो जाता है। अमर और तृप्त हो जाता है। अहंकार की मृत्यु होती है, तुम्हारी कभी नहीं होती। मृत्यु होती ही नहीं, लेकिन तुमने एक अपना काल्पनिक आकार, रूप समझ रखा है। उस कल्पना की मौत होती है। यह वचन श्रीमदभागवत कथा के छठे दिन में अतुल कृष्ण महाराज ने शिव मंदिर पंगलू में व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि स्वयं को खोते ही व्यक्ति सिद्ध हो जाता है। सारा भटकाव अहंकार का है। हम इसलिए नहीं भटकते कि कोई हमें भटका रहा है। हम इसलिए भटकते हैं कि हमारे अंदर अहंकार का मैं मौजूद है। कथा में भगवान श्री कृष्ण की अनेक बाल लीलाएं, महारास, कंस-वध एवं श्रीरुक्मिणी विवाह का प्रसंग सभी ने अत्यंत तन्मयता से सुना। इस अवसर पर अनेक मनमोहक झांकियां भी निकाली गईं।