आश्रम डेरा बाबा रुद्रानंद नारी में धर्मराज व्रत का उद्यापन करते श्रद्धालु। स्रोत संवाद
महिलाएं एक वर्ष तक रखती हैं 11 व्रत
अंतिम बार व्रत का धर्मराज के नाम पर किया जाता है उद्यापन
संवाद न्यूज एजेंसी
नारी (ऊना)। मकर संक्रांति के शुभ दिन आश्रम डेरा बाबा रुद्रानंद नारी में धूमधाम से मनाया गया। आश्रम में लगभग 150 परिवारों ने भगवान धर्मराज के व्रत का उद्यापन किया। महिलाएं एक वर्ष तक 11 व्रत रखने के बाद मकर संक्रांति के दिन व्रत का उद्यापन विधिपूर्वक करती हैं। मान्यता है कि धर्मराज हिंदू धर्म में न्याय के देवता हैं। पांडवों के बड़े भाई युधिष्ठिर का दूसरा नाम भी धर्मराज है। यानी युधिष्ठिर खुद धर्मराज का अवतार थे। पंडित श्याम सुंदर शर्मा ने बताया कि स्कंद और भविष्य पुराण के अनुसार जो भी इस व्रत को विधिपूर्वक करता है, उससे यमराज प्रसन्न होते हैं। वह व्यक्ति शिव और विष्णु लोक को प्राप्त होता है
मंगलवार को आश्रम में इकट्ठे हुए लगभग 150 परिवारों ने विद्वानों के मंत्र उच्चारण के साथ इस व्रत का उद्यापन किया। आश्रम में चारों तरफ चहल-पहल थी। मंत्रों की ध्वनि से आश्रम गूंजता रहा। पंडित श्याम सुंदर शर्मा ने बताया कि यह व्रत मोक्ष प्राप्ति के लिए होता है। यदि कोई व्रत रखने के बाद इसका उद्यापन जानकारी के अभाव में नहीं कर पाता तो उसके व्रत निष्फल जाते हैं। मंगलवार को इस व्रत का समय दोपहर 03:22 बजे तक रहा। व्रत का उद्यापन करने वाले परिवार विद्वान को बर्तन, खाने-पीने का सामान, बिस्तर, जूता, छाता, टॉर्च तथा जीवन में काम आने वाली सभी वस्तुओं का दान करते हैं। इसके साथ दक्षिणा देकर उन्हें प्रसन्न करते हैं। उद्यापन के उपरांत श्रद्धालुओं ने आश्रम के अधिष्ठाता सुग्रीवानंद के धूने पर जाकर माथा टेक कर आशीर्वाद लिया। इसके उपरांत लंगर का प्रसाद ग्रहण किया।