मुबारिकपुर (ऊना)। जिलाभर में आम जनमानस से लेकर राजनीतिक, सामाजिक और प्रशासनिक संस्थाएं समय-समय पर पौधे लगाने का कार्य करती हैं। वहीं हरे-भरे पेड़ों पर सरेआम नुकीली कीलें लगाकर विज्ञापन बोर्ड लटकाए जा रहे हैं। संबंधित विभागों की ओर से इस पर कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है।
वर्तमान में विभिन्न व्यापारिक कंपनियों, सामाजिक और धार्मिक संस्थाओं द्वारा सरकारी संपत्ति और सफेदा, पीपल, वटवृक्ष सहित अन्य पेड़ों पर बड़े-बड़े फ्लेक्स बोर्ड लगाकर नुकसान पहुंचाया जा रहा है। ऐसे में कहना गलत नहीं होगा कि पर्यावरण संरक्षण को लेकर अधिकतर अभियान मात्र एक दिन के फोटो खींचो तक सीमित रह गए हैं। मुबारिकपुर से चिंतपूर्णी मुख्य सड़क के किनारे पेड़ों पर कीलें लगाकर लटकाए गए विज्ञापन विभागीय कार्यप्रणाली पर सवालिया निशान लगाते हैं। ये विज्ञापन बोर्ड तेज हवाओं के दौरान दुर्घटनाओं को भी न्योता दे रहे हैं। वनस्पति विशेषज्ञों की मानें तो जिन पौधों पर कीलें या तार लगाए जाते हैं, उनके जाइलम और फ्लोएम को क्षति पहुंचती है तथा उनका पोषण शून्य हो जाता है। धीरे-धीरे पेड़ सूखने की कगार पर पहुंच जाता है।
हरे-भरे पेड़ों पर कीलों से विज्ञापन बोर्ड लगाना ट्री प्रोटेक्शन एक्ट को ठेंगा दिखाना है। वन विभाग को अपने कर्तव्य का निर्वहन करना चाहिए और हरी-भरी वन संपदा से हो रही ऐसी छेड़छाड़ पर सख्त कार्रवाई करनी चाहिए।
-सूर्यांश, गोंदपुर बनेहड़ा
हरे-भरे पेड़ों पर किसी भी तरह के विज्ञापनों को कीलें लगाकर लटकाना उनकी हत्या करने के समान है। वन विभाग व प्रशासन को सरकारी संपत्ति पर किसी भी तरह के विज्ञापन लगाने वालों के खिलाफ तत्काल कार्रवाई करनी चाहिए।
-सुरेश भारद्वाज, अध्यक्ष, टाईडी एंड सोबर टुमारो फाउंडेशन कुनेरन