आर्द्रा और पुनर्वसु नक्षत्र का शुभ संयोग, 13 को मनेगी लोहड़ी
लोहड़ी जलाने का शुभ मुहूर्त शाम 5:35 से रात 8:10 बजे तक
अग्नि में गुड, मूंगफली अर्पित कर लोकगीत गाकर मनाया जाता है पर्व
संवाद न्यूज एजेंसी
ऊना। सूर्य देव के मकर राशि में प्रवेश करने से एक दिन पहले 13 जनवरी सोमवार को लोहड़ी पर्व मनाया जाएगा। नवविवाहित जोड़ों और नवजात के लिए साल का पहला पर्व लोहड़ी खुशहाली लेकर आने वाला है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार इस साल लोहड़ी पर आर्द्रा और पुनर्वसु नक्षत्र का शुभ संयोग बन रहा है। इस दिन सोमवार और पूर्णिमा होने से यह पर्व नवविवाहितों के लिए अखंड सौभाग्यवती, जीवन पर्यंत पति का साथ और संतान सुख लेकर आएगा। ज्योतिषाचार्य डॉ. राजेश भारद्वाज ने बताया कि इस साल लोहड़ी पर्व नवविवाहिता और नवजात शिशु के लिए बेहद शुभ है। आर्द्रा, पुनर्वसु नक्षत्र, पूर्णिमा और सोमवार होने से यह पर्व खुशहाली लेकर आएगा। उन्होंने बताया कि लोहड़ी पर तिल दान करने का विशेष महत्व है। ऐसा करने से शुभ फल प्राप्त होते हैं।
पंडित जयदेव तिवारी ने बताया कि 13 जनवरी को लोहड़ी जलाने का शुभ मुहूर्त शाम 5:35 बजे से रात 8:10 बजे तक है। उन्होंने बताया कि यह पर्व नई फसल की कटाई का सूचक है। इस दिन अग्नि को जलाकर उसमें गुड, मूंगफली डाल कर हवन करना चाहिए। अग्नि के चारों ओर बैठकर पारंपरिक गीत, लोकगीत गाकर उत्सव मनाना चाहिए। लोहड़ी शब्द का तात्पर्य लकड़ी, उपले, रेवड़ी से है। सर्दियों में लकड़ी, उपले की अग्नि में इन वस्तुओं का दान करने से पुण्य प्राप्त होता है। वहीं, अग्निदेव प्रसन्न होते हैं।
लोहड़ी पर तिल का दान करना श्रेष्ठ
ज्योतिषाचार्य राजेश भारद्वाज ने बताया कि लोहड़ी के दिन नंदबाबा और माता यशोदा ने भगवान कृष्ण के जन्म के उपलक्ष्य पर भगवान शंकर की पूजा की थी। लोहड़ी पर बड़ा आयोजन किया था। वहीं, लोगों में तिल का दान किया था। इससे लोहड़ी पर शंकर पूजा और तिल दान करने की परंपरा शुरू हुई है। लोहड़ी पर तिल के दान को श्रेष्ठ माना गया है। तिल भगवान विष्णु के शरीर से उत्पन्न हुआ है। इसलिए तिल दान की महत्ता अधिक है। लोहड़ी पर तिल के लड्डू बनाकर दान करने चाहिए।
मोहरों की दुकान पर रेड- फोटो : akhnoor
मोहरों की दुकान पर रेड- फोटो : akhnoor
मोहरों की दुकान पर रेड- फोटो : akhnoor