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Una News: 41 हजार का कर्ज नहीं चुकाया, बैंक के हक में अदालत का फैसला

Fri, 25 Sep 2026 11:35 PM IST
शिमला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, ऊना
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दुलैहड़ (ऊना)। सिविल जज कोर्ट नंबर-तीन ऊना की अदालत ने कांगड़ा केंद्रीय सहकारी बैंक की ओर से दायर कर्ज वसूली के मामले में बैंक के पक्ष में फैसला सुनाया है। अदालत ने मुख्य कर्जदार और दो गारंटरों को संयुक्त रूप से 40,928 रुपये की बकाया राशि चुकाने के आदेश दिए हैं। इस रकम पर 31 मार्च 2016 से अंतिम भुगतान तक 12.5 प्रतिशत वार्षिक ब्याज भी देना होगा। वहीं, लोक निर्माण विभाग के सहायक अभियंता के खिलाफ बैंक का दावा साबित नहीं होने पर उनके विरुद्ध दायर वाद खारिज कर दिया गया। बैंक के अनुसार बनगढ़़ निवासी एक व्यक्ति ने 23 अप्रैल 2009 को बैंक से 41 हजार रुपये का टर्म लोन लिया था। ऋण की अदायगी 12.5 प्रतिशत वार्षिक ब्याज के साथ 60 मासिक किस्तों में करनी थी। प्रत्येक किस्त एक हजार रुपये निर्धारित थी और पहली किस्त मई 2009 से देय थी। दो अन्य लोगों ने ऋण की गारंटी दी थी। बैंक का कहना था कि कर्जदार ने निर्धारित भुगतान व्यवस्था का पालन नहीं किया और ऋण खाता बकाया हो गया। ऋण खाता नियमित करने के लिए बैंक ने 23 नवंबर 2015 को रिमाइंडर भेजा। इसके बाद 12 फरवरी 2016 को कानूनी नोटिस भी भेजा गया लेकिन बकाया राशि का भुगतान नहीं किया गया। बैंक के अनुसार 30 मार्च 2016 तक मूलधन और ब्याज समेत 40,928 रुपये बकाया थे। इसके बाद बैंक ने दो मई 2016 को वसूली के लिए अदालत में मुकदमा दायर किया। सुनवाई के दौरान मुख्य कर्जदार ने बैंक के दावे का विरोध करते हुए कहा था कि बैंक ने उससे खाली कागजों पर हस्ताक्षर करवाए थे और उसने पूरा ऋण चुका दिया है। हालांकि, इस दावे के समर्थन में कोई ठोस दस्तावेज या साक्ष्य पेश नहीं किया गया। बाद में मुख्य कर्जदार और अन्य प्रतिवादियों के अदालत में पेश न होने पर उन्हें एकतरफा कर दिया गया। अदालत ने कांगड़ा केंद्रीय सहकारी बैंक के पक्ष में फैसला सुनाते हुए मुख्य कर्जदार और दोनों गारंटरों से संयुक्त रूप से 40,928 रुपये की वसूली के आदेश दिए। यह राशि 30 मार्च 2016 तक के मूलधन और ब्याज के आधार पर तय की गई है। अदालत ने 31 मार्च 2016 से पूरी रकम की अदायगी तक 12.5 प्रतिशत वार्षिक ब्याज देने का भी आदेश दिया है। फैसला सिविल जज, न्यायालय नंबर तीन ऊना ने शुक्रवार को सुनाया।
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