कैश निकासी के िलए बैंक में उमड़ी भीड़।
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नोटबंदी के करीब एक माह के बाद वीरवार को पगार की पहली तारीख को सरकारी कर्मचारियों को तनख्वाह का टोटा पड़ गया। कर्मियों के बैंक खाते में तनख्वाह तो आई, लेकिन जरूरी मासिक भुगतान के लिए कर्मचारी महज दस हजार ही खातों से निकाल पाए। घंटों तक बैंकों में लाइन में लगने के बाद कर्मचारियों को उस वक्त झटका लगा, जब बैंक की ओर से उन्हें महज दस हजार ही थमाए गए।
वहीं, कई कर्मचारियों को लाइनों में लगने के बाद भी जरूरत के हिसाब से नकदी नहीं मिल पाई। इससे कर्मचारियों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा। वीरवार को बैंकों में कई कर्मचारी बाकायदा घर से ही फार्म भरकर बैंकों में पहुंचे, लेकिन जरूरत के हिसाब से नकदी न मिलने के चलते उन्हें भारी परेशानी हुई। वहीं, जिले के अधिकांश एटीएम भी कैश न होने के कारण बंद रहे।
जहां एटीएम खुले थे, वहां लंबी लाइनों के चलते कर्मचारी अपनी सैलरी नहीं निकाल पाए। जिले के संतोषगढ़, दुलैहड़, बंगाणा सहित अन्य जगहों पर कई बैंकों के एटीएम दिन भर बंद रहे। इससे लोगों को कैश के लिए इधर-उधर चक्कर काटने को मजबूर होना पड़ा। कर्मचारियों महेश कुमार, राज कुमार, राजेश शर्मा का कहना है कि दोपहर बाद उनके खातों में सैलरी तो पहुंची, लेकिन जरूरत के हिसाब से उन्हें कैश नहीं मिल पाया, जिसके चलते भुगतान करना मुश्किल हो रहा है। गौर है कि नोटबंदी के बाद से लोगों को कैश के लिए माथा पच्ची करनी पड़ रही है। लेकिन, अभी तक व्यवस्था पटरी पर नहीं आ सकी है। खासकर इन दिनों में कारोबारियों और जिनके घर शादियां हैं, उन्हें भारी दिक्कतें झेलने को मजबूर होना पड़ रहा है।