बीज के अच्छे से अंकुरित होने में मिलेगी मदद
जिले में बीते एक सप्ताह से जारी है मक्की की बिजाई
संवाद न्यूज एजेंसी
ऊना। जिले में मक्की की पारंपरिक खेती के लिए हल्की बारिश फायदेमंद साबित हो रही है। इससे बीज अच्छे से अंकुरित होने में मदद मिलेगी। जिला में इस समय पारंपरिक खेती की बिजाई का दौर जारी है। अधिकतर इलाकों में बिजाई प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। अब किसान नियमित बारिश के लिए प्रार्थना कर रहे हैं।
जानकारी के अनुसार ऊना में 20000 हेक्टेयर के अधिक क्षेत्र में मक्की की पारंपरिक फसल की बिजाई होती है। इसमें अधिकतर इलाके गैर सिंचित हैं। ऐसे में केवल समय पर बारिश और धूप के सहारे फसल तैयार होती है। अभी तक फसल की आवश्यकता अनुसार बारिश हो रही है। इससे खेतों में जलभराव जैसी स्थिति पैदा नहीं हुई। किसानों को आस है कि फसल के लिए अनुकूल बने मौसम से बीज अच्छे से अंकुरित हो पाएगा। किसान जगदीप सिंह, रमेश कुमार, योगराज, अमृतपाल, सतेंद्र सिंह ने बताया कि गैर सिंचित इलाकों में बारिश समय पर होने से फसलें शानदार होती हैं। कहा कि किसान जानवरों या फसलों से जुड़े अन्य खतरों से निपट सकता है, लेकिन मौसम की मार से फसल नहीं बचाई जा सकती। अगर इस बरसात में बारिश अच्छी रही तो निश्चित तौर पर पैदावार बेहतर होगी।
जिले में बीते एक सप्ताह से मक्की की बिजाई जारी है। किसान बारिश के बाद खेतों में पर्याप्त नमी को देखते हुए बिजाई कर रहे हैं। हालांकि जिन खेतों में नमी अधिक है, वहां बिजाई के लिए धूप खिलने का इंतजार है। किसानों का कहना है कि अगर अधिक नमी में बिजाई कर दें तो बीज में सड़न पैदा होने का भय रहता है।
उपनिदेशक जिला कृषि विभाग ने बताया कि मक्की के शानदार किस्म के बीज सब्सिडी पर उपलब्ध हैं। किसान कृषि विभाग के विक्रय केंद्रों में जाकर बीज की खरीद कर सकते हैं।