आशियाना खत्म हुए हौसलें नही ......ऊना के लाल सिगीं में पिछले आग से राख हुई झुगियों कोफिर से
ऊना। भीषण गर्मी और लू के कहर के बीच आशियाना जल जाने का दर्द झेल रहे प्रवासी मजदूरों ने पूरी रात खुले आसमान तले अपने आशियाने की राख पर बिताई। जिला प्रशासन के आपदा प्रबंधन और पुख्ता इंतजामों के दावों की पोल खुलकर सामने आई है।
दिनभर की तपिश के बाद भी रात को हालात में कोई राहत नहीं मिली, जिससे छोटे बच्चों और महिलाओं की हालत और भी दयनीय बनी रही।
शुक्रवार को लालसिंगी में हुए अग्निकांड में मजदूरों की झुग्गियां जल कर राख हो चुकी हैं। सारा सामान, कपड़े और राशन जलकर खाक हो गया। सिर छुपाने के लिए छत तक नहीं बची। ऐसे में मजदूरों ने अपने उजड़े आशियाने की राख के बीच ही रात काटी।
घटना के बाद प्रशासन हरकत में तो आया लेकिन राहत व्यवस्था नाकाफी नजर आई। शनिवार दोपहर बाद करीब साढ़े तीन बजे प्रशासन की ओर से आनन-फानन में राशन किटें जरूर वितरित की गईं लेकिन न तो रहने की कोई व्यवस्था की गई और न ही खाना बनाने के लिए जरूरी संसाधन उपलब्ध कराए गए। प्रभावित चंद्रकली निवासी मुरादाबाद ने कहा कि वह 20 साल से इसी स्थान पर रह रहे हैं। हर माह भूमि मालिक को 500 रुपये किराये के रूप में दे रहे हैं। लेकिन मूलभूत सुविधाओं को लेकर कुछ नहीं मिल रहा। आखिर जाएं तो कहां जाएं।
आशियाना खत्म हुए हौसलें नही ......ऊना के लाल सिगीं में पिछले आग से राख हुई झुगियों कोफिर से
आशियाना खत्म हुए हौसलें नही ......ऊना के लाल सिगीं में पिछले आग से राख हुई झुगियों कोफिर से
आशियाना खत्म हुए हौसलें नही ......ऊना के लाल सिगीं में पिछले आग से राख हुई झुगियों कोफिर से
आशियाना खत्म हुए हौसलें नही ......ऊना के लाल सिगीं में पिछले आग से राख हुई झुगियों कोफिर से