स्वां नदी में विसर्जित की जौ की खेती
संवाद न्यूज एजेंसी
घनारी (ऊना)। गगरेट उपमंडल में चैत्र नवरात्र का समापन बड़े ही श्रद्धा और भक्ति भाव से हुआ। नवमी के पावन अवसर पर ग्रामीण क्षेत्र के लगभग हर घर और मंदिर में परंपरागत विधि-विधान से कन्या पूजन किया गया। नौ दिन तक चले इस पवित्र पर्व का समापन कन्याओं को हलवा, पूरी और चने का भोग अर्पित कर किया गया। सवेरे से ही भक्तगण पूजा की तैयारियों में जुट गए। घर-घर में कन्याओं को देवी का रूप मानकर उनका पूजन किया गया। व्रतधारी महिलाओं और कन्याओं ने विशेष रूप से नौ दिन तक उगाई गई जौ की खेत्री का मां दुर्गा के भजनों के साथ स्वां नदी में प्रवाहित किया। धार्मिक मान्यता के अनुसार जौ की खेती शक्ति और समृद्धि का प्रतीक मानी जाती है। इसे नवरात्र के पहले दिन मिट्टी में बोया जाता है और नौवें दिन इसका विसर्जन किया जाता है। जौ की हरी-भरी बालियां यह दर्शाती हैं कि व्रत-पूजन सही विधि से किया गया है। मंदिरों में दिनभर भजन-कीर्तन और मां दुर्गा पाठ का आयोजन चलता रहा। हजारों श्रद्धालु भंडारों में शामिल होकर प्रसाद ग्रहण करते नजर आए।