संवाद न्यूज एजेंसी
थुनाग (मंडी)। बेमौसमी बर्फबारी के बाद बढ़ी ठंड से वन्यजीव प्रभावित हुए हैं और ऊंचाई वाले क्षेत्र के जानवर निचले इलाकों में दिखने लगे हैं। हाल ही में बालीचौकी में सांभर और घोरल को लोगों ने रेस्क्यू के नाम पर दौड़ा-दौड़ाकर मार डाला, जबकि वन विभाग ने बिना जांच उनका अंतिम संस्कार कर दिया।
इसके विपरीत सराज वन क्षेत्र के लेहगला में एक कक्कड़ सड़क पर दिखा, जिसे कार सवारों ने बिना नुकसान पहुंचाए सुरक्षित जंगल जाने दिया। डीएफओ सुरेंद्र कश्यप के अनुसार जानवरों को डराने या दौड़ाने से कैप्चर मायोपैथी हो सकती है, जिसमें तनाव के कारण मांसपेशियां क्षतिग्रस्त हो जाती हैं और किडनी फेलियर से मौत तक हो सकती है। उन्होंने लोगों से आग्रह किया है कि जंगली जानवरों को डराएं नहीं और उन्हें सुरक्षित जंगल की तरफ जाने दें।