गगरेट (ऊना)। औद्योगिक क्षेत्र गगरेट में आई जल प्रलय के बाद उद्योग विभाग व स्थानीय प्रशासन भी हरकत में आए हैं। सोमवार को उद्योग विभाग के संयुक्त निदेशक अंशुल धीमान ने औद्योगिक क्षेत्र का दौरा कर परिस्थितियों का जायजा लिया। उन्होंने नाले के निकासी द्वार छोटे होने की बात बाढ़ संरक्षण मंडल पर डाल दी। इस प्रलय के लिए उन्होंने उन उद्योगों को भी जिम्मेदार ठहराया है, जो कचरे को नाले में फेंकते हैं। वहीं एसडीएम सौमिल गौतम के साथ जायजा लेने पहुंचे बाढ़ संरक्षण मंडल के अधिशासी अभियंता पंकज कुमार ने कहा कि नाले के निकास द्वार पर पाइप कलवर्ट की जगह बाक्स कलवर्ट बनाया जा सकता है। अभी तक बाढ़ संरक्षण मंडल के पास इस कार्य के लिए बजट ही नहीं है।
रविवार को औद्योगिक क्षेत्र गगरेट से निकलने वाले नाले का निकास द्वार अवरुद्ध हो जाने के चलते ऐसी जल प्रलय आई कि कई उद्योग इसमें डूब गए। इसके चलते कई उद्योगों को भारी नुकसान उठाना पड़ा है। हालांकि उपायुक्त जतिन लाल ने बरसात के मौसम से पहले ही तमाम नाले-नालियों की साफ-सफाई की हिदायत दी थी लेकिन औद्योगिक क्षेत्र गगरेट से निकलने वाले नाले की समय रहते सफाई नहीं हो सकी। नाले में उगी झाड़ियां और नाले में फेंके गए कचरे के चलते ही रविवार को नाले का निकासी द्वार अवरुद्ध हो गया। नाले का पानी ओवरफ्लो होकर उद्योगों में जा घुसा। हैरत की बात है कि इंडस्ट्रियल एरिया डेवलपमेंट अथॉरिटी हर साल उद्योगों से एनुअल मेंटीनेंस चार्ज लेती है। ऐसे में सवाल यह है कि आखिर बरसात के मौसम से पहले नाले की सफाई क्यों नहीं करवाई जाती। सोमवार को आए उद्योग विभाग के संयुक्त निदेशक अंशुल धीमान ने उद्योगपतियों को नाले की सफाई करवाने का आश्वासन दिया है।