ऊना। सिविल अस्पताल दौलतपुर चौक के सेप्टिक टैंक में डूबकर हुई मासूम बच्ची की मौत की जांच पुलिस के लिए भी पहेली बन गई है। पुलिस अभी तक यह तय नहीं कर पा रही है कि इस हादसे का जिम्मेदार कौन है।
बहरहाल एसपी डॉ. कार्तिकेयन गोकुलचंद्रन ने घटनास्थल के दौरे के बाद अब इस मामले में कानूनी सलाह लेने का निर्णय लिया है। सूत्रों के अनुसार पुलिस इस केस में मंगलवार को पब्लिक प्रोसिक्यूटर से संपर्क करेगी। गौरतलब है कि इस संवेदनशील मामले में पहले ही पुलिस की किरकिरी हो चुकी है। लिहाजा अब पुलिस किसी भी नतीजे तक पहुंचने से पहले अभियोजन से सलाह लेगी। इसके बाद चार्जशीट तैयार की जाएगी। हाल ही में एसपी ऊना ने घटनास्थल का दौरा कर 15 दिन के भीतर चार्जशीट दाखिल करने की बात कही है। लिहाजा पुलिस ने इस मामले की जांच तेज कर दी है।
गौरतलब है कि बीते 24 जनवरी को दिन-दहाड़े ढाई वर्षीय नन्ही परी खेलते-खेलते सेप्टिक टैंक में गिर गई थी। दो घंटे बाद जब उसे सेप्टिक टैंक से निकाला गया। इसकी कुछ देर बाद ही उसकी मौत हो गई। 11 फरवरी को इस मामले की जांच धीमी गति से चलने पर परिजनों ने कड़ा रोष जताया था। माता-पिता ने प्रशासन को दो टूक चेतावनी दी थी कि या तो परी की मौत की जांच 10-12 दिन के अंदर पूरा करके दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाए नहीं तो वो अस्पताल परिसर में धरना देंगे। परी की मां कमलेश कुमारी और पिता भूपेंद्र सिंह नेे कहा था कि बेटी को मौत को काफी समय हो जाने के बाद भी उन्हें न्याय नहीं मिला। इसके बाद एसपी ने घटनास्थल पर जाकर मुआयना किया। परी की मौत के बाद आनन-फानन में पुलिस ने जिस व्यक्ति को ठेकेदार समझ आरोपी बनाया वो प्लंबर था। उसके पास ठेकेदार का लाइसेंस तक नहीं है। इस वजह से प्लंबर और पीड़ित पिता ने सोशल मीडिया पर जांच में लापरवाही पर खूब भड़ास निकाली थी। स्थानीय लोगों और विपक्ष ने भी इस मुद्दे को उठाया था। इस पर मामले की जांच डीएसपी अंब मनोज जंवाल को सौंपी थी।
इस बारे में एसपी डॉ. कार्तिकेयन गोकुलचंद्रन का कहना है कि मामला संवेदनशील है। पुलिस जल्द इसकी चार्जशीट तैयार करेगी। उससे पहले पब्लिक प्रोसिक्यूटर से कानूनी सलाह ली जाएगी। उन्होंने बताया कि इस मामले में वे मंगलवार को जांच अधिकारी से इनपुट लेंगे।