ऊना। केंद्रीय जल शक्ति मंत्रालय से कैच द रेन अभियान की दो सदस्यीय टीम ने विकास खंड बंगाणा के तहत पीपली गांव में ड्रेगन फल के बगीचे का दौरा किया। टीम में निदेशक डॉ. प्रमोद कुमार और वैज्ञानिक डॉ. प्रवीण कुमार शामिल रहे।
उन्होंने ड्रेगन फल की खेती में प्रयोग किए जा रहे सभी उर्वरकों और उसके रखरखाव के बारे में विस्तारपूर्वक जानकारी प्राप्त की। उद्यान विभाग के उपनिदेशक डॉ. केके भारद्वाज ने दो सदस्यीय टीम को बताया कि ड्रेगन फल के बगीचे लगाने के बाद इसका रखरखाव ग्रामीण विकास विभाग की मनरेगा स्कीम के तहत किया जा रहा है। बागवानी विभाग द्वारा एमआईडीएच स्कीम के तहत अगस्त 2023 में पीपली के किसानों की 25 कनाल भूमि पर सुपर फ्रूट कहे जाने वाले फल ड्रेगन के ताइवान पिंक किस्म के 3300 पौधों का बगीचा लगाया गया था। विभाग ने जानवरों की रोकथाम के लिए कंपोजिट फेंसिंग, सिंचाई के लिए ड्रिप सिंचाई प्रणाली, भूमि का विकास, कंक्रीट के पोल तथा ड्रेगन के उच्च किस्म के पौधे किसानों को उपलब्ध करवाए हैं।
डॉ. केके भारद्वाज ने बताया कि यह फल कैल्शियम व आयरन जैसे पोषक तत्वों का एक स्मृद्ध स्रोत है। इसमें वसा, कोलेस्ट्रॉल और सोडियम का स्तर बिलकुल भी नहीं या बहुत कम होता है। यह पौधा उच्च जैविक या अजैविक तनाव स्तरों की स्थितियों में भी उच्च उत्पादकता बनाए रखने की अपनी खासियत के लिए जाना जाता है। इसलिए इसे उपभोक्ताओं के अच्छे स्वास्थ्य और उत्पादकों की आय का अच्छा स्रोत माना जा रहा है। यह 15-20 साल या उससे अधिक समय तक जीवित रह सकता है। ताजा खाने के अलावा ड्रैगन फ्रूट का उपयोग जैम, आइसक्रीम, जैली, पेय, जूस, नैक्टर, वाइन आदि बनाने के लिए भी किया जा सकता है।
इस अवसर पर बीडीओ बंगाणा सुशील कुमार, अधिशाषी अभियंता ग्रामीण विकास विभाग बंगाणा डॉ. वीरेंद्र भारद्वाज, बागवानी विकास अधिकारी बंगाणा अनुपम शर्मा, बागवानी प्रसार अधिकारी, प्रधान ग्राम पंचायत बल्ह तथा किसान रोशन लाल, मदनलाल, प्रेमवती और दीप कुमार उपस्थित रहे। संवाद