कहा- शिक्षण संस्थानों में ओबीसी वर्ग के बच्चों के नहीं मिल रहे अधिकार
संवाद न्यूज एजेंसी
ऊना। किसान योद्धा सरदार रुड़का सिंह कल्याण समिति की बैठक वीरवार को इंजीनियर बलवीर चौधरी की अध्यक्षता में हुई। बलवीर चौधरी ने कहा कि संत शिरोमणि गुरु रविदास और डॉ. भीमराव आंबेडकर समानता के प्रतीक थे। उन्होंने कहा कि 93वां संविधान संशोधन, शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2010, संविधान की धारा 309 और हाईकोर्ट के आदेश प्रदेश में सही ढंग से लागू न होने के कारण समाज में असमानता बढ़ रही है, जबकि संविधान की मूल भावना समानता पर आधारित है।
उन्होंने कहा कि सांसद और विधायक संविधान की शपथ लेकर देश में समानता लाने का संकल्प लेते हैं, लेकिन दुर्भाग्य से प्रदेश के उच्च शिक्षण संस्थानों में 103वां संविधान संशोधन लागू कर दिया गया, जबकि 93वां संशोधन अब तक लागू नहीं किया गया, जिससे ओबीसी वर्ग को उनका हक नहीं मिल पा रहा। प्रदेश के मेडिकल कॉलेजों में ओबीसी वर्ग के केवल 14 डॉक्टर हर साल बन रहे हैं, जबकि सामान्य वर्ग से 57 और अनुसूचित जाति वर्ग से 84 डॉक्टर बनते हैं। यदि 93वां संविधान संशोधन 19 वर्ष पूर्व लागू कर दिया जाता तो ओबीसी वर्ग के 18 प्रतिशत आरक्षण के तहत हर वर्ष 104 डॉक्टर तैयार हो रहे होते। प्रदेश के डिग्री कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में ओबीसी वर्ग को आरक्षण कोटा नहीं मिल रहा, जबकि सामान्य वर्ग को 10 प्रतिशत और अनुसूचित जाति वर्ग को 15 प्रतिशत कोटा मिल रहा है। यदि समानता के अधिकार को ही जाति के आधार पर तय करना है तो 68 विधायकों को संविधान की शपथ नहीं लेनी चाहिए थी। प्रदेश सरकार ने 2555 एसएमसी शिक्षकों और मल्टी-टास्क वर्करों की भर्ती बिना रोस्टर प्रणाली के कर दी, जिससे सामान्य वर्ग को 10 प्रतिशत, ओबीसी वर्ग को 18 प्रतिशत और दलित वर्ग को 15 प्रतिशत नौकरियां नहीं मिल पाईं। भर्ती नियमों के अनुसार नियमित शिक्षकों की नियुक्ति या तो कमीशन के माध्यम से या रोजगार कार्यालय की बैचवाइज प्रक्रिया से ही की जा सकती है। सरकारी स्कूलों में शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने के लिए केवल नियमित (पक्के) शिक्षकों की नियुक्ति होनी चाहिए, लेकिन वर्ष 2012 से 2017 तक 2555 एसएमसी कच्चे शिक्षक नियुक्त किए गए, जो शिक्षा का अधिकार अधिनियम, 2010 का उल्लंघन है।