बंगाणा क्षेत्र के गांवों में भारी बारिश तथा हवाओं से खेतों में ही बिछी मक्की की फसल। संवाद
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ंगाणा (ऊना)। जिले के पहाड़ी क्षेत्रों में साल में केवल दो फसलें मक्की और गेहूं की उगाई जाती हैं। इन दोनों मुख्य फसलों पर कभी जानवरों और कभी मौसम की मार पड़ जाती है। इस साल भी बंगाणा के कई इलाकों में किसानों के दिन रात एक कर फसल को जानवरों से बचाया। अब इस फसल पर मौसम की मार पड़नी शुरू हो गई है। तेज हवाओं के झोंको से मक्की की लहलहाती फसल जमीन पर गिरने लगी है।
जानकारी के अनुसार तेज बारिश और हवाओं से बंगाणा उपमंडल के चंबोआ, चडोली, कोकरा, बुहाणा, हरोट, कडथोली, कुखेड़ा, चपलाह, धनेत, ठठूह सहित अन्य गांवों में मक्की की फसल खेतों में ही बिछ गई थी। किसानों ने बड़ी मुश्किल से खराब हुई फसल को इकट्ठा तो कर लिया। परंतु मंगलवार सुबह से ही घने बादलों ने एक बार फिर किसानों के चेहरों से रौनक छीन ली है।
क्षेत्र के किसानों में सोमनाथ सोनी, सुरेश ठाकुर, नरेंद्र धीमान, अशोक ठाकुर, सतीश शर्मा, रवि शर्मा सुखदेव शर्मा ने कहा कि इस समय अगर और बारिश हुई तो मक्की की फसल को बहुत नुकसान होगा। बता दें कि क्षेत्र में कुछ स्थानों पर मक्की की फसल की कटाई शुरू हो चुकी है और कुछ किसान मौसम साफ होने का इंतजार कर रहे हैं।
उपनिदेशक जिला कृषि विभाग कुलभूषण धीमान ने बताया कि क्षेत्र में इस बार मक्की की पैदावार अच्छी रही है। कहा कि अगर मौसम की मार से कहीं फसल को नुकसान पहुंचने की उनको सूचना मिलती है तो विभाग की ओर से मौके का जायजा लिया जाएगा।