गगरेट (ऊना)। जिला के गगरेट में ड्रग तस्करी के संगीन मामले में संलिप्तता पाए जाने पर गगरेट थाना प्रभारी और मुंशी को पुलिस लाइन ऊना ट्रांसफर कर दिया गया है। मामले में थाना प्रभारी सन्नी गुलेरिया और मुंशी रजत पर गाज गिरी है। इसके अलावा सब-इंस्पेक्टर अजीत सिंह, साइबर सेल के कर्मी राजन व अनिल पर भी मोबाइल से छेड़छाड़ व सबूत नष्ट करने के आरोप सिद्ध हुए हैं। उनके खिलाफ जांच अभी जारी है। ड्रग तस्करी के इस संगीन मामले में पुलिस का नाम आना न केवल विभाग की छवि को धूमिल कर रहा है बल्कि यह भी दर्शाता है कि संगठित अपराध के खिलाफ लड़ाई में कहीं न कहीं भीतरघात गंभीर खतरा बन चुका है। मामले की जांच स्टेट सीआईडी के हवाले है और जांच में पुलिस पर न केवल लापरवाही बल्कि सीधे तौर पर ड्रग तस्करों को संरक्षण देने के आरोप सामने आए। इस सनसनीखेज मामले में पुलिस थाना गगरेट के तत्कालीन थाना प्रभारी सन्नी गुलेरिया सहित पांच पुलिस कर्मियों के खिलाफ विभिन्न धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज की गई। ध्यान रहे कि मामला 15 सितंबर 2023 का है जब एएनटीएफ की टीम ने गगरेट में एक अंतरराज्यीय ड्रग तस्कर गिरोह का पर्दाफाश किया था। कार्रवाई के दौरान भारी मात्रा में नशीली दवाइयों का जखीरा बरामद हुआ और आठ आरोपी, जिनमें मुख्य सरगना वीरेंद्र बिंदु भी शामिल था, गिरफ्तार किए गए। जांच में सामने आया कि गिरोह ट्रांसपोर्ट कंपनियों के जरिये बाहरी राज्यों से नशीली दवाइयां मंगवा रहा था। पुलिस ने मौके से महासू राम नामक आरोपी का मोबाइल जब्त किया जिसमें वीरेंद्र बिंदु के व्हाट्सएप संदेश और बिल्टी मौजूद रहे। यह सबूत इस केस की रीढ़ माने जा रहे थे लेकिन जब मोबाइल को फॉरेंसिक जांच के लिए भेजा गया तो वह क्रप्ट पाया गया। सीआईडी जांच में यह चौंकाने वाला तथ्य सामने आया कि 23 सितंबर को जिला पुलिस के साइबर सेल के दो कर्मी मोबाइल अपने कब्जे में लेकर संदिग्ध गतिविधियां करते हुए सीसीटीवी में कैद हुए। इस मामले में पांच आरोपी पहले से सलाखों के पीछे हैं। अब थाना प्रभारी गगरेट और मुंशी पर गाज गिरी है। सीआईडी के आला अधिकारी ने बताया कि मामले की जांच जारी है। जल्द इस में और बड़े खुलासे संभावित हैं।