जिले में स्थापित करीब 500 उद्योग हैं। इनमें खाद्य, फार्मा, लोहा, प्लास्टिक और अन्य उत्पाद बनाने वाली इकाइयां शामिल हैं। ये सभी युद्ध के संकट से जूझ रही हैं। उद्योगपतियों के अनुसार यदि हालात जल्द नहीं सुधरे तो उत्पादन में और गिरावट तय है। दूसरी ओर, पैकिंग सामग्री के दामों में आई तेज बढ़ोतरी ने लागत का संतुलन बिगाड़ दिया है। पेट्रोकेमिकल आधारित कच्चे माल की कीमतों में लगभग 50 प्रतिशत तक वृद्धि होने से तैयार उत्पाद महंगे हो गए हैं। इसका सीधा असर बाजार सप्लाई और ऑर्डर पूर्ति पर पड़ रहा है।
उद्योगों के सामने अब दोहरी चुनौती है। एक ओर उत्पादन घट रहा है, दूसरी ओर लागत बढ़ रही है। ऐसे में समय पर ऑर्डर पूरा करना मुश्किल होता जा रहा है, जिससे व्यापारिक संबंधों पर भी असर पड़ने का खतरा है।
अगर स्थिति नहीं सुधरी तो छोटे और मध्यम उद्योगों के लिए अस्तित्व का संकट खड़ा हो सकता है। सबसे अधिक संकट पॉलीमर इकाइयों पर है। ग्राहकों की मांग के अनुसार सप्लाई नहीं कर पा रहे, जिससे व्यापारिक संबंधों पर भी असर पड़ने का खतरा है। -
सीएस कपूर, मैहतपुर उद्योग संघ के अध्यक्ष
हालात ऐसे ही रहे तो आने वाले समय में उद्योगों को बंद करने की नौबत आ जाएगी। बॉयलर चलाने के लिए पूरा ईंधन नहीं मिल पा रहा है दूसरा पैकिंग सामग्री के दाम भी आसमान छूने लगे हैं। -
राकेश कौशल, टाहलीवाल उद्योग संघ के अध्यक्ष