ऊना एचआरटीसी बस अड्डा का दृश्य। संवाद
ऊना। हिमाचल पथ परिवहन निगम (एचआरटीसी) के ऊना डिपो में ई-टिकट योजना हांफनी शुरू हो गई है। ऊना डिपो में एचआरटीसी परिचालकों द्वारा कार्यालय में रोज जमा किए जाने वाले किराये का आंकड़ों के अनुसार यूपीआई से किराये का भुगतान कम और नकदी अधिक जमा हो रही है। करीब दो वर्ष पहले शुरू हुई ई-टिकट योजना को लेकर निगम प्रबंधन गंभीर नजर नहीं आ रहा है।
ऊना डिपो के कार्यालय में इस वर्ष मार्च महीने के अंत में करीब तीन करोड़ रुपये की नकद राशि जमा की गई है जबकि ई-टिकट मशीन में यूपीआई के जरिये निगम के खाते में महज 12 लाख रुपये ही पहुंचे हैं। यह अंतर बताता है कि डिजिटल भुगतान व्यवस्था या तो सही तरीके से लागू नहीं हो पाई है या फिर यात्रियों और परिचालकों के बीच इसका उपयोग बेहद सीमित है। इसे लेकर एचआरटीसी के बस कंडक्टरों को प्रशिक्षण भी दिया गया था लेकिन कई बस परिचालक ऑनलाइन किराया लेने से कतरा रहे हैं। उनका कहना है कि कई बार बस ऐसे स्थान से गुजरती है जहां पर नेटवर्क की दिक्कत होती है। ऐेसे में ऑनलाइन किराया बीच में ही अटक जाता है जबकि यात्री के खाते से पैसे कट चुके होते हैं। ऐसे में काफी परेशानी झेलनी पड़ती है। इसकी कारण कंडक्टर नकद किराया ले रहे हैं। ऊना डिपो को 155 ई-टिकट मशीनें मुहैया करवाई गई हैं। निगम के लोकल और लंबे रूटों पर ई-टिकट मशीनें परिचालकों को दी गई हैं। इस एक मशीन का मूल्य करीब तीस हजार रुपये बताया जा रहा है लेकिन इनका पूरा इस्तेमाल वर्तमान में नहीं किया जा रहा है।
यह है ई-टिकट योजना
ई-टिकट योजना प्रदेश सरकार ने वर्ष 2024 के मई महीने में शुरू की थी। एचआरटीसी बसों में यूपीआई से किराया देने की सुविधा मुहैया करवाई गई थी। इसके माध्यम से यात्री यूपीआई, डेबिट कार्ड और क्रेडिट कार्ड के माध्यम से अपना किराया दे सकता है। यात्रियों और एचआरटीसी बस कंडक्टरों के बीच खुले पैसों को लेकर आय दिन होने वाले विवादों लगाम लग सके।
सभी परिचालकों को ई-टिकट मशीनों से डिजिटल किराया लेने के आदेश दिए गए हैं। यदि कोई ऐसा नहीं करता है और ऐसा न करनेे की शिकायत आती है तो सख्त कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।
-राजेश जोशी, कार्यकारी उपमंडलीय प्रबंधक ऊना