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Himachal News: ड्रोन से होगी खेतों में फसलों के रोगों की पहचान, प्रशिक्षु इंजीनियरों ने तैयार की तकनीक

Mon, 09 Feb 2026 11:23 AM IST
अंकेश डोगरा जसवीर ठाकुर, ऊना।

सार

हिमाचल प्रदेश में ट्रिपल आईटी ऊना के प्रशिक्षु इंजीनियरों ने नई तकनीक निकाली है जिसकी मदद से अब ड्रोन के माध्यम से खेतों में फसलों के रोगों की पहचान हो सकेगी। पढ़ें पूरी खबर...
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सांकेतिक तस्वीर। - फोटो : अमर उजाला नेटवर्क
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विस्तार
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अब ड्रोन के माध्यम से खेतों में फसलों के रोगों की पहचान हो सकेगी। ट्रिपल आईटी ऊना के प्रशिक्षु इंजीनियरों ने यह तकनीक निकाली है। इससे रोग मुक्त फसल तैयार करने में मदद मिलेगी। इतना ही नहीं बल्कि ड्रोन के माध्यम से दवा का भी छिड़काव कर सकेंगे। इससे एक फायदा यह होगा कि किसानों को कम मजदूरी और लागत में स्मार्ट खेती का समाधान हो सकेगा।
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ट्रिपल आईटी ऊना के प्रशिक्षु इंजीनियरों के अनुसार तीन से चार महीने में यह तकनीक बाजार में उतार दी जाएगी, जोकि कम लागत में किसानों को मुहैया होगी। ट्रिपल आईटी ऊना के टेक्निकल फेस्टिवल ‘मेराकी-2026’ में इस तकनीक के बारे में काफी उत्सुकता के साथ जानकारी जुटाने में प्रशिक्षु इंजीनियर और बाहरी निजी और सरकारी स्कूलों से आए बच्चे पहुंच रहे हैं। ट्रिपल आईटी ऊना के निदेशक प्रोफेसर मनीष गौर के अनुसार नवाचार के इस युग में प्रशिक्षु इंजीनियर नई-नई तकनीक अख्तियार कर रहे हैं और यह तकनीक भी इस दिशा में एक नई पहल है। इसका फायदा किसानों को होगा।
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इस तकनीक के माध्यम से जहां मजदूरी भी कम लगेगी और समय भी बचेगा। किसान इस तकनीक की मदद से खेती-बाड़ी कर सकेंगे। जिससे फसल की गुणवत्ता जहां एक ओर बढ़ेगी। वहीं दाम भी पर्याप्त होंगे। पीएचडी की छात्रा धर्मशाला निवासी महक का कहना है कि इस ड्रोन के माध्यम से फसल को लगने वाला किट और कीड़े की पहचान हो सकेगी। जानवरों से भी बचाव होगा। इस ड्रोन में एआई तकनीक का कैमरा भी स्थापित किया गया है और उसकी इमेज के माध्यम से फसल के बारे में विश्लेषण किया जा सकता है। ट्रिपल आईटी ऊना के तृतीय वर्ष के बीटेक प्रशिक्षु इंजीनियर निवासी उत्तर प्रदेश दीपू विश्वनाथ का कहना है कि इस तकनीक के माध्यम से कम समय और मजदूरी की मदद से किसानों की समस्या का समाधान करने में यह तकनीक मददगार साबित होगी।

ट्रिपल आईटी ऊना के प्रोफेसर मृत्युंजय का कहना है कि दो तीन महीने में यह तकनीक तैयार की गई है और कोशिश की जा रही है कि छोटे से छोटे किसान तक यह तकनीक पहुंचाई जा सके। इसके लिए कम लागत पर इसको तैयार किया जा रहा है। एजुकेशनल तौर पर यह डिजाइन किया गया है। जोकि तीन से चार महीने बाद बाजार में उतार जाएगा और ड्रोन निर्माता कंपनी को सुपुर्द कर दिया जाएगा। इसमें एक एप्लीकेशन भी तैयार की जा रही है। जोकि सीधे तौर पर किसानों के खेतों की जानकारी उनके मोबाइल पर पहुंचेगी।
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