टूटी उम्मीदें
एमएसएमई सेक्टर की लिमिट बढ़ाकर उद्यमियों को किया खुश
किसी ने नीरस तो किसी ने बजट को बताया जनता का बजट
संवाद न्यूज़ एजेंसी
मैहतपुर (ऊना)। केंद्रीय आम बजट को किसी ने नीरस तो किसी ने आम जनता का बजट बताया है। एमएसएमई सेक्टर को बढ़ावा देने के लिए बजट में लिमिट को बढ़ाकर छोटे और मझोले उद्यमियों को खुश करने का प्रयास किया गया है। जहां तक हिमाचल प्रदेश में रेल विस्तार को लेकर इस बजट में कुछ खास तोहफा मिला हो, ऐसा नजर नहीं आ रहा है। पहले से चल रही रेल परियोजनाओं को उसके मुकाम तक पहुंचाने के लिए पिछले पारित बजट की तर्ज पर ही राशि ज़रूर प्रदान की गई है। हमीरपुर संसदीय क्षेत्र से पूर्व सांसद सुरेश चंदेल ने कहा कि वित्त मंत्री की ओर से प्रस्तुत आम बजट प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आम जनता को समर्पित बजट से जोड़कर देखा जा रहा है। सबसे निचले पायदान से लेकर मध्यम वर्गीय परिवारों को ध्यान में रखा गया है। यह बजट पूरी तरह से जनता को समर्पित है। हालांकि, इस बजट में उद्योग जगत खासकर पहाड़ी राज्य हिमाचल प्रदेश के लिए कुछ विशेष नहीं है, लेकिन एमएसएमई सेक्टर को बढ़ावा देने के लिए लिमिट में वृद्धि जरूर की गई है। मैहतपुर उद्योग संघ के अध्यक्ष उद्यमी सीएस कपूर का कहना है कि पहाड़ी राज्यों को मिलने वाले पैकेज को नहीं बढ़ाया गया है, जिससे नए उद्योगों के होने की संभावनाएं भी धूमिल सी नजर आ रही हैं। शिवसेना के प्रांतीय अध्यक्ष एवं इनकम टैक्स के विशेषज्ञ शिवदत्त वशिष्ठ ने कहा कि नौकरी पेशा लोगों को टैक्स में और अधिक राहत देकर कर्मचारियों को खुश करने का प्रयास किया गया है। कहा कि बजट में मिठास तो दिखाई दे रही है पर हर रस नहीं है। रेल विस्तार के मामले में आम बजट में हिमाचल को इस बार भी ठगा ही गया है।