आयुष पद्धति को बढ़ावा देने के लिए रोपे गए हैं औषधीय पौधे
शतावर, अश्वगंधा, आंवला, स्टीविया सहित विविध पौधे लगाए
संवाद न्यूज एजेंसी
ऊना। हिमाचल सरकार प्रदेश में जहां आधुनिक स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ बनाने पर जोर दे रही है, वहीं पारंपरिक आयुर्वेद और आयुष चिकित्सा पद्धति को भी नई ऊर्जा प्रदान की जा रही है। ऊना जिले के स्कूलों और आयुष संस्थानों के परिसर अब औषधीय पौधों की सौंधी महक से सराबोर हो रहे हैं। लगभग 9.42 लाख रुपये की लागत से तैयार किए गए ये हर्बल गार्डन स्वास्थ्य जागरूकता और प्राकृतिक चिकित्सा को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हो रहे हैं।
जिला आयुष अधिकारी ऊना किरण शर्मा ने बताया कि जिले के पांच विद्यालय राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला बेहड़ जसवां, रावमापा कुठार कलां, रावमापा भदसाली, रावमापा पिरथीपुर और रावमापा थानाकलां में हर्बल गार्डन विकसित किए जा चुके हैं। इस कार्य पर 1.25 लाख रुपये व्यय किए गए। इन उद्यानों में शतावर, अश्वगंधा, स्टीविया, एलोवेरा, आंवला, हरड़ और बेहड़ सहित अनेक औषधीय पौधे लगाए गए हैं। उद्देश्य है बच्चों में प्राकृतिक चिकित्सा के प्रति रुचि विकसित करना और आयुष पद्धति की वैज्ञानिक उपयोगिता को समझाना।
किरण शर्मा के अनुसार जिले के सभी आयुष स्वास्थ्य केंद्रों में 2.25 लाख रुपये की लागत से पॉटेड हर्बल गार्डन स्थापित किए गए हैं। इसके अतिरिक्त 13 आयुष आरोग्य मंदिरों में 5.92 लाख रुपये की लागत से 3232 औषधीय पौधे रोपे गए हैं, जो स्थानीय स्तर पर औषधीय संसाधनों के संरक्षण और संवर्धन की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास है। जिलाधीश ऊना जतिन लाल ने कहा कि आयुर्वेद स्वास्थ्य देखभाल का एक मजबूत और किफायती माध्यम है। औषधीय उद्यानों के माध्यम से लोगों को प्राकृतिक चिकित्सा से जोड़ने के प्रयास निश्चित रूप से बेहतर जीवनशैली और स्वस्थ समाज के निर्माण में सहायक सिद्ध होंगे।