ऊना। मनरेगा में बिना कार्य कराए कामगार की फर्जी हाजिरी लगाकर धनराशि निकालने के मामले में आरोपी बहडाला पंचायत प्रधान को सोमवार को उपायुक्त ने निष्कासित कर दिया है। यह कार्रवाई उन्होंने एसडीएम के जांच रिपोर्ट के आधार पर की है। इसके अलावा प्रधान को आगामी छह वर्ष की अवधि के लिए पंचायत के पदाधिकारी के रूप में निर्वाचन लड़ने के लिए निर्हरित किया है।
दरअसल, ग्राम पंचायत बहडाला की प्रधान सोनिया राणा के विरुद्ध शिकायतें दर्ज कराई गई थीं। आरोप था कि पंचायत प्रधान मनरेगा के तहत कराए गए कार्यों में बिना काम के ही कामगारों की फर्जी हाजिरी लगाकर धनराशि हड़प ली हैं। इस पर तत्कालीन उपायुक्त ऊना ने प्रकरण को कड़ा संज्ञान में लेते हुए जांच के आदेश दिए थे। इसकी जिम्मेदारी एसडीएम ऊना को सौंपी थी। मामले की जांच करने के बाद एसडीएम ने मनरेगा कार्यों में हुए गड़बड़ी की रिपोर्ट उपायुक्त को सौंपी। इस पर उपायुक्त राघव शर्मा ने अनियमितताओं के चलते ग्राम पंचायत बहडाला की प्रधान को निष्कासित करने का निर्देश दिया है।
उपायुक्त राघव शर्मा ने बताया कि पंचायत बहडाला की प्रधान सोनिया राणा को तत्काल प्रभाव से निष्कासित करने के आदेश जारी किए गए हैं। कहा कि पंचायती राज अधिनियम 1994 की धारा 146(2) के तहत उन्हें इन आदेशों के जारी होने की तिथि से आगामी छह वर्ष की अवधि तक पंचायत के पदाधिकारी के रूप में निर्वाचन लड़ने के लिए निर्हरित किया गया है। साथ ही उन्हें पंचायत की चल-अचल संपत्ति तत्काल पंचायत सचिव ग्राम पंचायत बहडाला को सौंपने के निर्देश दिए गए हैं।