बंगाणा (ऊना)। उपमंडल बंगाणा क्षेत्र के विभिन्न गुग्गा जाहरवीर मंदिरों में छत्र पूजा की जाती है। सोमवार को पूर्व मंत्री वीरेंद्र कंवर ने उपमंडल बंगाणा क्षेत्र के लखरूह तथा अलसाहन गुग्गा जाहरवीर मंदिरों में छत्र पूजा करने के उपरांत बताया कि रक्षाबंधन के दिन से गुग्गा नवमी तक गुग्गा महाराज के गुणगान की परंपरा सदियों से हमारे समाज में चली आ रही है।
यह प्राचीन परंपरा आज भी कायम है। भक्तों द्वारा बनाया गया एक विशेष प्रकार के छत्र को गुग्गा जी का निशान कहा जाता है। इस छत्र को लेकर गुग्गा जी के भक्त गांव-गांव व घर-घर जाकर गुग्गा जी का अगले नौ दिन तक गुणगान करेंगे। भक्तजनों द्वारा गुरु गोरखनाथ की महिमा व गुग्गा जी के चमत्कारों को गाकर सुनाया जाता है। वीरेंद्र कंवर ने बताया कि गुग्गावीर जी शेषनाग के साक्षात अवतार हैं, जो हिंदुओं और मुसलमानों में समान रूप से पूजनीय हैं। श्रावण की पंचमी तिथि को इनकी पूजा नाग पंचमी के रूप में, जबकि भाद्रपद माह की कृष्ण पक्ष की गुग्गा नवमी पर इनकी नर रूप में आराधना की जाती है। इस दिन नाग देवता की पूजा करने का बहुत महत्व है। इस त्योहार को मनाने से सभी सुहागिनें सौभाग्यवती रहती हैं, उनके पति की विपत्तियों से रक्षा होती है। मन की सभी इच्छाएं पूरी होती हैं।
मान्यता है कि श्रद्धा से नाग पूजन करने से घर के सभी सदस्यों को सात पीढ़ियों तक सर्पदंश का भय नहीं रहता है। कुटलैहड़ विधानसभा क्षेत्र लखरूह अलसाहण चपलाह धनेत अरलू नारी देवी सिंह, बही बैसकां कोकरा, कसनेट, दगडाह, बडूहा सोहारी हरोट सहित कई मंडलियां गुग्गा जी का आस्था व श्रद्धा से गुणगान करती हैं। इस मौके पर पूर्व प्रधान मदन राणा, समाजसेवी चरणजीत शर्मा, बीडीसी सदस्य राजेन्द्र ठाकुर, राज कुमार, अशोक ठाकुर, राजेन्द्र ठाकुर, जमीत सिंह, अजय ठाकुर, रवि ठाकुर, तरसेम लाल, मनजीत सिंह सहित अन्य भक्तजन भी मौजूद रहे।
उपमंडल बंगाणा क्षेत्र की जसाणा पंचायत के लखरूह में गुगा मंदिर में छत्र की पूजा-अर्चना करते हुए