बीए से लेकर एमए तक के विद्यार्थियों को पढ़ाने में कॉलेज प्रबंधन के हाथ खड़े
मुख्यालय के काॅलेज को छोड़कर अन्य कॉलेज में पांच से सात पद स्वीकृत
संवाद न्यूज एजेंसी
ऊना। राजकीय महाविद्यालय ऊना में एक इंग्लिश प्रोफेसर के सहारे पढ़ाई की व्यवस्था चलाई जा रही है, जिसका खामियाजा विद्यार्थियों को भुगतना पड़ रहा है। महाविद्यालय में पहले पांच पद स्वीकृत थे, जिनमें से वर्तमान में तीन पद ही रह गए हैं और इन तीन पदों में से भी एक पद इंग्लिश प्रोफेसर की पदोन्नति के चलते खाली चल रहा है और एक अन्य पद महिला प्रोफेसर के मातृत्व अवकाश पर चले जाने की सूरत में सितंबर तक खाली रहेगा।
वर्तमान में एक ही इंग्लिश के प्रोफेसर के सहारे बीए से लेकर एमए तक के विद्यार्थियों को पढ़ाने में कॉलेज प्रबंधन के हाथ खड़े हो गए हैं। कॉलेज में वर्तमान में 3800 के तकरीबन विद्यार्थी शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं, जिनमें से बीए में ही 600 बच्चे शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं और एमए इंग्लिश में भी प्रति सेमेस्टर में 60-60 बच्चे शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं, लेकिन इंग्लिश का प्रोफेसर एक ही होने की सूरत में कॉलेज में इंग्लिश की पढ़ाई की व्यवस्था पूरी तरह से लड़खड़ाकर रह गई है। खास पहलू यह भी है कि राजकीय महाविद्यालय ऊना मुख्यालय का एकमात्र ऐसा कॉलेज है, जहां पर मात्र तीन ही पद रह गए हैं। जबकि ऊना जिला के अन्य कॉलेज में पांच से सात पद इंग्लिश के प्रोफेसर स्वीकृत हैं। लेकिन मुख्यालय के एकमात्र राजकीय महाविद्यालय ऊना होने से और ऊपर से दो पद वर्तमान में खाली चलने से कॉलेज एक ही इंग्लिश प्रोफेसर के सहारे चला हुआ है।
गत दिनों शिक्षा विभाग के निदेशक ने कॉलेज का दौरा भी किया था। कॉलेज प्रबंधन की ओर से इंग्लिश प्रोफेसर के पदों की संख्या बढ़ाने के लिए प्रस्ताव भी भेजा गया, लेकिन धरातल पर कुछ भी होता नजर नहीं आया है। इस बारे में राजकीय महाविद्यालय ऊना प्रिंसिपल डॉक्टर मीता शर्मा क्या कहना है कि जिला मुख्यालय का राजकीय महाविद्यालय ऊना में इंग्लिश प्रोफेसर के तीन ही पद स्वीकृत हैं, जिनमें से दो पद खाली चले हुए हैं और अन्य महाविद्यालय में सात-सात पद इंग्लिश के प्रोफेसर के स्वीकृत हैं। इस बारे में शिक्षा विभाग के आला अधिकारियों को प्रस्ताव भी भेजा है, लेकिन वर्तमान में इंग्लिश प्रोफेसर एक ही कॉलेज में होने की सूरत में बच्चों की पढ़ाई बाधित हो रही है।