संवाद न्यूज एजेंसी
दौलतपुर चौक (ऊना)। डेरा पंडित हरि शाह दरबार अंबोआ में चल रही श्रीमद गो भागवत कथा के तीसरे दिन रविवार को कथावाचक कृष्ण कन्हैया जोशी ने राजा बलि की कथा का वर्णन किया। उन्होंने कहा कि यदा यदा हि धर्मस्य ग्लानिर्भवति भारत, अभ्युत्थानमधर्मस्य तदात्मानं सृजाम्यहम्। अर्थात भगवान श्रीकृष्ण कहते हैं कि जब-जब धर्म का ह्रास और अधर्म का उत्थान होता है, तब-तब वे अपने स्वरूप को प्रकट करते हैं ताकि धर्म की स्थापना हो सके और अधर्म का विनाश हो सके। जो भक्त सच्चे मन से भक्ति करता है, उसकी सहायता के लिए भगवान स्वयं दौड़कर आते हैं। बताया कि किस तरह असुरों के राजा बलि ने देवताओं को युद्ध में पराजित कर दिया था और स्वर्ग अपने कब्जे में ले लिया था। बलि की वजह से सभी देवता बहुत दुखी थे। दुखी देवता अपनी माता अदिति के पास पहुंचे और अपनी समस्या बताई। इसके बाद अदिति ने पति कश्यप ऋषि के कहने पर एक व्रत किया। इसके शुभ फल से भगवान विष्णु ने वामन देव के रूप में जन्म लिया और दैत्यराज बलि को पराजित कर उसका अहंकार तोड़ दिया था। इस मौके पर डेरा पंडित हरि शाह दरबार के मौजूदा सेवादार बाबा राकेश शाह ने भी प्रवचन किए। इस मौके पर बड़ी संख्या में श्रोताओं ने कथा का श्रवण कर डेरे में माथा टेककर आशीर्वाद प्राप्त किया।