बैठकों में लगातार नदारद रहने पर शहरी विकास विभाग ने की कार्रवाई
संवाद न्यूज एजेंसी
गगरेट (ऊना)। मादक द्रव्य पदार्थ अधिनियम के तहत जेल में बंद नगर पंचायत गगरेट के पूर्व अध्यक्ष एवं पार्षद वरिंद्र कुमार उर्फ बिंदू अब पार्षद भी नहीं रहे हैं। नगर पंचायत की बैठकों से नदारद रहने के चलते शहरी विभाग के प्रधान सचिव देवेश कुमार ने बाकायदा अधिसूचना जारी करके वरिंद्र कुमार को एचपी म्युनिसिपल एक्ट 1994 की सेक्शन 273(1) (ई) के तहत पार्षद पद से हटा दिया है। जिला ऊना में किसी चुने हुए पार्षद के विरुद्ध यह पहली कार्रवाई है। वरिंद्र कुमार बिंदू का राजनीति का सफर भी बड़ा दिलचस्प रहा है। पहली बार नगर पंचायत गगरेट से चुनाव मैदान में उतरे वरिंद्र कुमार बिंदू वार्ड पांच से पहली बार ही पार्षद चुने गए और पहली बार ही प्रधान पद की कुर्सी पर पहुंचने में कामयाब रहे। हालांकि वह साथी पार्षदों को साथ लेकर चलने में नाकाम रहे। ऐसे में बीच में ही उनके विरुद्ध अविश्वास प्रस्ताव आ गया और उन्हें प्रधान की कुर्सी गंवानी पड़ी। इसी बीच वरिंदर कुमार बिंदू एनडीपीएस एक्ट के तहत गिरफ्तार हुए। वर्तमान में वह बनगढ़ जेल में हैं। लगातार नगर पंचायत की बैठकों से नदारद रहने पर उनके विरुद्ध कार्रवाई शुरू हुई। इसकी शिकायत शहरी विकास विभाग के पास पहुंचने पर एडीसी ऊना महेंद्र पाल गुर्जर को जांच अधिकारी नियुक्त किया गया। उन्होंने अपनी जांच में पाया कि वरिंद्र कुमार बिंदू पर कई आपराधिक मामले दर्ज हैं। साथ ही वर्तमान में एनडीपीएस एक्ट में वह जेल में बंद है। जांच अधिकारी की रिपोर्ट जाने पर विभाग ने वरिंद्र कुमार बिंदू को कारण बताओ नोटिस भी जारी किया। लेकिन उसका भी कोई जवाब नहीं मिला। इसके बाद विभाग ने हिमाचल प्रदेश चुनाव आयुक्त व विधि विभाग से राय लेने के बाद अब वरिंद्र कुमार बिंदू को पार्षद पद से हटा दिया है।