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Una News: कोहरे की मार से हरी सब्जी की फसल प्रभावित, कपड़े से ढक रहे किसान

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किसानों ने कहा सब्जी की वृद्धि रुकी, नुकसान होने की संभावना
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जिले के मैदानी इलाकों में बड़े स्तर पर लगाई गई है हरी सब्जियों की फसलें

संवाद न्यूज एजेंसी

ऊना। जिले में लगातार पड़ रहे घने कोहरे का असर अब हरी सब्जियों की तैयार होती फसलों पर दिखने लगा है। ठंडे मौसम और कोहरे के कारण पौधों की वृद्धि रुक गई है, जिससे किसान फसल बचाने के लिए विभिन्न उपाय अपनाने को मजबूर हैं। जनवरी माह की शुरुआत से कोहरे का प्रभाव लगातार बढ़ता जा रहा है।
जानकारी के अनुसार जिले के मैदानी और सिंचाई सुविधा संपन्न क्षेत्रों में गोभी, पालक, गाजर, मटर, मूली सहित अन्य हरी सब्जियों की खेती की जा रही है। इन फसलों की तैयार में बीज, खाद और अन्य संसाधनों पर किसानों को भारी खर्च उठाना पड़ता है। कई इलाकों में फसलें पूरी तरह तैयार हो चुकी हैं, जबकि कुछ क्षेत्रों में लगभग 50 प्रतिशत फसल तैयार है। विशेष रूप से बढ़वार की अवस्था में मौजूद पौधों पर ठंडे मौसम का अधिक प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है।
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कोहरे के कारण गोभी सहित अन्य सब्जियों के पौधों की वृद्धि प्रभावित हो रही है। वहीं, स्वां नदी के आसपास के क्षेत्रों में अभी भी घीया, कद्दू, करेला, मिर्च और टमाटर जैसी सब्जियों की बुआई जारी है। कोहरे से बचाव के लिए किसान पॉलीथिन शीट और जालीदार कपड़ों से सुबह व रात के समय फसलों को ढक रहे हैं। धूप निकलते ही पौधों को ढकने वाला कपड़ा या पॉलीथिन हटा दी जाती है।
किसान प्रेम चंद, रविंद्र कुमार, अश्वनी कुमार, रमेश कुमार और अजय कुमार सहित अन्य किसानों ने बताया कि फसलों को कोहरे से बचाना इस समय बड़ी चुनौती बना हुआ है। उन्होंने कहा कि सामान्य परिस्थितियों में गोभी जैसी फसलें कोहरे से अधिक प्रभावित नहीं होतीं, लेकिन इस बार मौसम का असामान्य असर देखने को मिल रहा है। किसान फसल बचाव के लिए हरसंभव प्रयास कर रहे हैं, हालांकि मौसम सामान्य होने का इंतजार ही एकमात्र विकल्प है।
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जिला कृषि विभाग के उपनिदेशक डॉ. कुलभूषण धीमान ने बताया कि सर्दी के मौसम में फसलों को कोहरे से बचाने के लिए कई उपाय उपलब्ध हैं। उन्होंने किसानों को सलाह दी कि वे जालीदार कपड़े से फसलों को ढकें और धूप निकलने पर उन्हें हटा दें। साथ ही फसलों की नियमित सिंचाई करते रहें। किसी भी प्रकार की समस्या या दुविधा होने पर किसान कृषि विभाग से संपर्क कर सकते हैं।
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