गगरेट (ऊना)। प्रदेश में प्रतिबंधित प्रजाति की लकड़ी के अन्य राज्यों को निर्यात पर लगी रोक के बावजूद वन माफिया प्रकृति का चीरहरण कर प्रतिबंधित प्रजाति के पेड़ों की लकड़ी की तस्करी कर इसे पंजाब की मंडियों में पहुंचाने को मशगूल हैं। रविवार रात्रि भी हिमाचल-पंजाब की सीमा से कुछ दूर पहले वन विभाग की टीम ने दो वाहनों को प्रतिबंधित प्रजाति के पेड़ों की लकड़ी के साथ जब्त किया है। पिछले दस दिनों में ही वन विभाग की अलग-अलग टीमों ने पंजाब को तस्करी कर प्रतिबंधित प्रजाति के पेड़ों की लकड़ी ले जा रहे पांच वाहन जब्त किए हैं।
प्रतिबंधित प्रजाति के पेड़ों की लकड़ी के निर्यात पर लगी रोक के बावजूद पंजाब को तस्करी कर ले जाई जा रही लकड़ी के साथ वन माफिया को पकड़ने के लिए वन मंडल अधिकारी ने अलग-अलग टीमें गठित कर रात को नाके लगवाने शुरू किए हैं। इसके सकारात्मक परिणाम भी सामने आ रहे हैं। वन विभाग के रेंज अफसर अविनाश भगत, वन खंड अधिकारी उधम सिंह, फारेस्ट गार्ड आरती और पूजा की टीम ने पहले फलदार आम के पेड़ की लकड़ी के साथ एक वाहन जब्त किया। वहीं वन खंड अधिकारी अशोक कुमार, फारेस्ट गार्ड विक्रांत, पंकज और बलदेव सिंह पर आधारित टीम ने अम्बोटा-आशादेवी मार्ग पर नाका लगाकर कांगड़ा से प्रतिबंधित प्रजाति की लकड़ी लेकर आए एक वाहन को जब्त किया।
इसके बाद वन खंड अधिकारी अशोक कुमार और टीम ने इसी मार्ग पर नाकेबंदी के दौरान एक और वाहन रंगे हाथ जब्त किया। अब छह नवंबर को अंबोटा-आशादेवी मार्ग पर नाकेबंदी के दौरान रेंज अफसर गिरधारी लाल, वन खंड अधिकारी उधम सिंह, फारेस्ट गार्ड किशोर कुमार और अजय कुमार पर आधारित टीम ने कांगड़ा की ओर से प्रतिबंधित प्रजाति के पेड़ों की लकड़ी ला रहे एक वाहन को जब्त करने में सफलता हासिल की है।
रेंज अफसर अविनाश भगत ने बताया कि वन मंडल अधिकारी के दिशा-निर्देश के अनुसार कानून को हाथ में लेने वालों के विरुद्ध वन विभाग सख्ती से निपट रहा है।