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Himachal News: मक्की बिजाई से पहले हिमाचल प्रदेश में खाद संकट, इफको के गोदामों में नहीं पहुंची खेप

Mon, 15 Jun 2026 12:32 PM IST
Ankesh Dogra संवाद न्यूज एजेंसी, ऊना।

सार

हिमाचल प्रदेश में खरीफ सीजन की मक्की बिजाई से पहले 12-32-16 खाद की भारी कमी हो गई है। इफको गोदामों में खाद की खेप नहीं पहुंचने से किसान परेशान हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि समय पर खाद नहीं मिलने से फसल की शुरुआती वृद्धि और उत्पादन प्रभावित हो सकता है। पढ़ें पूरी खबर...
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खाद की बोरियां। - फोटो : अमर उजाला नेटवर्क
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विस्तार
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खरीफ सीजन में मक्की बिजाई शुरू होने से पहले ही किसानों के सामने खाद संकट गहरा गया है। प्रदेशभर के इफको गोदामों में मक्की बिजाई के दौरान बड़े स्तर पर इस्तेमाल होने वाली 12-32-16 खाद की खेप अब तक नहीं पहुंच पाई है। इससे किसानों की चिंता बढ़ गई है। हर वर्ष जून के मध्य से मक्की की पारंपरिक बिजाई का कार्य तेज हो जाता है। प्रदेश के विभिन्न हिस्सों में बारिश के बाद जमीन में नमी भी पर्याप्त मात्रा में है। फसल बिजाई के दौरान खेतों में सबसे अधिक 12-32-16 खाद का प्रयोग किया जाता है लेकिन इस बार अधिकांश खाद गोदाम खाली पड़े हैं। किसान कई दिनों से गोदामों के चक्कर काट रहे हैं, लेकिन उन्हें खाद उपलब्ध नहीं हो पा रही।
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किसान जसविंदर सिंह ने बताया कि खाद की आवश्यकता के समय गोदाम खाली पड़े हैं। अब अन्य खाद का विकल्प खोज रहे हैं। 12-32-16 खाद का छिड़काव न होने का फसल पर असर होना तय है। किसान रोहित कुमार ने बताया कि फसलों के अच्छे उत्पादन में खाद का समय पर छिड़काव अहम भूमिका निभाता है। इस समय कहीं भी खाद नहीं मिल रही। दूरदराज के बड़े गोदामों के भी चक्कर काट लिए। उधर मक्की की बिजाई का समय सिर पर है। यही हालात रहे तो कई वर्षों में पहली बार होगा, जब बिना खाद छिड़काव के फसल की बिजाई करनी पड़ेगी।
 

युद्ध के चलते अटका कच्चे माल की आयात
बताया जा रहा कि खाड़ी देशों में जारी युद्ध जैसे हालात के कारण खाद तैयार करने के लिए इस्तेमाल होने वाले कच्चे माल का आयात प्रभावित हुआ है। इसका सीधा असर देशभर में खाद उत्पादन और सप्लाई पर पड़ा है। प्रदेश में भी पर्याप्त मात्रा में खाद नहीं पहुंच पा रही, जिससे कृषि क्षेत्र में चिंता का माहौल है। उपनिदेशक जिला कृषि विभाग डॉ. प्रेम ठाकुर के अनुसार ऊना के किसान बीते दशकों से बिजाई के समय 12-32-16 एनपीके का छिड़काव करते हैं। ऐसे में बिजाई के समय खाद उपलब्ध न होने से मक्की की फसल की शुरुआती वृद्धि प्रभावित हो सकती है। किसानों का कहना है कि यदि आगामी दिनों में खाद की आपूर्ति नहीं सुधरी तो बिजाई कार्य प्रभावित होने के साथ उत्पादन पर भी असर पड़ सकता है।
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सब्जियों के अलावा सेब के लिए होता है प्रयोग
सोलन में नकदी फसलों जैसे टमाटर, शिमला मिर्च, गोभी और सेब के साथ-साथ मक्की की फसल में भी बड़े पैमाने पर खाद का प्रयोग होता है। खाद न मिलने से फसलों के उत्पादन और गुणवत्ता पर बुरा असर पड़ने की आशंका है। हिमफेड ने अप्रैल से ही खाद की मांग भेजी हुई है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चल रहे युद्ध के कारण कच्चे माल की आपूर्ति प्रभावित हुई है, जिससे खाद तैयार नहीं हो पा रही है।

यूरिया खाद की 350 मीट्रिक टन मांग के मुकाबले सिर्फ 90 मीट्रिक टन खाद मिल पाई। वहीं अप्रैल में 150 मीट्रिक टन की मांग भेजी गई थी, जिसमें से महज 67 मीट्रिक टन की ही आपूर्ति हुई। इस माह के लिए 850 मीट्रिक टन की भारी-भरकम मांग भेजी गई है, लेकिन अभी तक खाद की खेप नहीं पहुंच पाई है। यही हाल 12-32-16 खाद का भी है, जिसकी सप्लाई अप्रैल, मई और जून महीने से पूरी तरह ठप पड़ी है। विभाग की ओर से इसकी कुल 450 मीट्रिक टन की मांग भेजी जा चुकी है, लेकिन किसानों को निराशा ही हाथ लग रही है।

इफको हिमाचल प्रदेश के राज्य विपणन प्रबंधक डॉ. सुधीर सिंह कटियार ने बताया कि खाड़ी देशों में चले युद्ध के कारण खाद तैयार करने के लिए कच्चे माल की सप्लाई बाधित हो रही है। खाद की नई खेप की डिमांड भेजी गई है। आपूर्ति आते ही आवश्यकतानुसार वितरण किया जाएगा।
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