अधिकतर गोदामों में नहीं 12-32-16 खाद
दो महीने से जारी नहीं की गई है सप्लाई
संवाद न्यूज एजेंसी
ऊना। खरीफ सीजन की शुरुआत से पहले जिले में किसानों को खाद के संकट का सामना करना पड़ रहा है। मक्की की बिजाई का समय नजदीक आते ही खेतों की तैयारियों में जुटे किसानों की चिंता बढ़ गई है। सहकारी सभाओं और गोदामों में 12-32-16 खाद की खेप लगभग समाप्त हो चुकी है। अधिकतर खाद के गोदामों में करीब दो माह से नई सप्लाई नहीं पहुंची है। ग्रामीण क्षेत्रों में इन दिनों किसान खेतों की जुताई और बुवाई की तैयारियों में जुटे हुए हैं। मक्की की फसल के लिए 12-32-16 खाद को सबसे उपयुक्त माना जाता है लेकिन मौजूदा समय में यही खाद बाजार और सहकारी समितियों से गायब है। किसानों का कहना है कि यदि समय रहते खाद उपलब्ध नहीं हुई तो मक्की की बिजाई प्रभावित हो सकती है, जिसका सीधा असर उत्पादन पर पड़ेगा।
किसानों राजीव कुमार, सुरेश सैनी, विजय कुमार, अमृतलाल, तरसेम लाल, रामपाल आदि ने बताया कि कई सहकारी सभाओं और गोदामों के चक्कर लगाने के बावजूद उन्हें खाद नहीं मिल पा रही। कुछ स्थानों पर सीमित मात्रा में उपलब्ध खाद भी किसानों को जरूरत के अनुसार नहीं दी जा रही। मजबूरी में कई किसानों को निजी दुकानों का रुख करना पड़ रहा है, जहां अधिक कीमत पर खाद मिलने की शिकायतें भी सामने आ रही हैं।
किसानों का कहना है कि खेती पहले ही महंगी हो चुकी है। डीजल, बीज और मजदूरी के बढ़ते खर्च के बीच अब खाद की कमी ने उनकी परेशानियां और बढ़ा दी हैं। ऊना में करीब दो माह से नई खेप जारी नहीं की गई है।
इफ्को के क्षेत्रीय प्रबंधक माशोक अहमद का कहना है कि नई खेप की मांग भेजी गई है। मई के अंत या जुलाई शुरुआत तक नई खेप आने की संभावना जताई जा रही है। हालांकि, अभी तक सप्लाई को लेकर कोई स्पष्ट तिथि तय नहीं हुई है।
उपनिदेशक जिला कृषि विभाग डॉ. प्रेम ठाकुर का कहना है कि मक्की की फसल के शुरुआती चरण में संतुलित उर्वरक बेहद जरूरी होता है। ऐसे में खाद की कमी लंबे समय तक बनी रही तो इसका असर खेती की उत्पादकता पर पड़ सकता है।