ऊना। जिला में गेहूं की कटाई के बाद किसानों ने मक्की के साथ हरी सब्जियों की खेती शुरू कर दी है। इस बार अधिकतर किसानों ने हरी सब्जियों की बिजाई की है। बिजाई के 10 दिन बाद अब सब्जियों के पौधों पर कीड़े की मार पड़ने लगी है। पौधों को कीड़ों के हमला से बचाने के लिए किसानों ने एहतियातन कीटनाशकों का छिड़काव करना शुरू कर दिया है।
जानकारी के अनुसार जिला में वर्तमान में बैंगन, भिंडी, शिमला मिर्च, फ्रासबीन, घीया, कद्दू जैसी हरी सब्जियां उगाई जा रही है। इनमें से बैंगन की फसल अभी शुरुआती चरण में है। हालांकि बीते शुक्रवार को बारिश होने के बाद किसानों को फसलों की सिंचाई से तो राहत मिली, लेकिन अब पत्तियों को लगने वाले कीड़े ने परेशानी को बढ़ा दिया है।
किसानों में सुनील, विनोद कुमार, हरिकृष्ण, बलदेव सिंह ने कहा कि अमूमन बैंगन की फसल को कीड़े से बचाना एक बड़ी चुनौती रहता है। ऐसा पहली बार नहीं है कि कीड़े ने इस फसल पर हमला किया है। कई खेतों में कीड़े ने पत्तियों को खाना शुरु कर दिया है। इससे बचाव के लिए कीटनाशकों का इस्तेमाल किया गया है।
जिला में लगातार बादल छाए रहने से किसानों को कीटनाशकों के छिड़काव का उम्मीद मुताबिक असर देखने को नहीं मिल रहा। दरअसल, छिड़काव के साथ तेज धूप खिलने पर कीटनाशक का असर बेहतर तरीके से होता है। मगर लगातार बादल छाए रहने से छिड़काव का अच्छा असर नहीं हुआ। रविवार को सुबह के समय धूप खिलने के बाद दोबारा बादलों ने डेरा डाल लिया।
संतोषगढ़, हरोली, ऊना और अंब क्षेत्र के किसान बड़े स्तर पर हरी सब्जियों की खेती करते हैं। बैंगन की खेती शुरुआती चरण में है और बाकी फसलों को सब्जियों तैयार होने वाला है। गर्मी के मौसम में इस खेती को कीड़े से बचाने के लिए जरूरी दवाइयों का छिड़काव समय-समय पर जरूरी है। किसान किसी प्रकार की दुविधा होने पर कृषि विभाग के अधिकारियों से परामर्श ले सकते हैं।
-डॉ. कुलभूषण धीमान, उपनिदेशक, जिला कृषि विभाग