ऊना में आलू के खेतों में सिंचाई के लिए छोड़ा पानी। -संवाद
ऊना। जिला में बीते दिनों दोपहर के समय तेज धूप खिलने के बाद अब फसलों को सिंचाई की जरूरत पड़ने लगी है। किसानों ने सिंचाई कार्य शुरू कर दिया है। इसके लिए ज्यादा जमीन वाले किसान मजदूरों की भी मदद ले रहे हैं। विशेष रूप से आलू की फसल के लिए यह समय बेहद महत्वपूर्ण है, क्योंकि सिंचाई में देरी से पैदावार प्रभावित हो सकती है।
वर्तमान में जिले में मुख्य रूप से आलू और गेहूं की फसलें तैयार हो रही हैं। कुछ किसान मटर और गोभी की खेती भी कर रहे हैं। गेहूं की फसल सिंचित और गैर-सिंचित दोनों इलाकों में बड़े पैमाने पर उगाई जाती है। दो दिनों से बादल छाए रहने से किसानों को बारिश की उम्मीद जगी थी, लेकिन बारिश नहीं हुई।
बिना बारिश बीते दिनों जिला ऊना में अधिकतम तापमान 34 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया। इससे दोपहर की तेज धूप ने मिट्टी की ऊपरी परत को पूरी तरह सुखा दिया है। सिंचित क्षेत्रों के किसान फसल बचाने के लिए सिंचाई कर रहे हैं, लेकिन गैर-सिंचित इलाकों में बारिश न होने से फसलों के प्रभावित होने की आशंका है।
किसान राजेश कुमार, रविंद्र सिंह, अश्वनी कुमार, विनोद कुमार और तरसेम लाल ने बताया कि आलू की फसल की गुड़ाई प्रक्रिया भी शुरू हो गई है। सिंचाई के कुछ दिन बाद गुड़ाई करना उपयुक्त माना जाता है। इससे पैदावार भी अच्छी होती है। गुड़ाई के बाद उर्वरक भी डाला जाएगा।
कृषि विभाग के उपनिदेशक कुलभूषण धीमान ने बताया कि आलू की फसल को नियमित सिंचाई की जरूरत होती है। गेहूं को फिलहाल अधिक पानी की आवश्यकता नहीं है। आने वाले कुछ दिनों में अगर बारिश होती है तो फसल की वृद्धि तेज होगी और पैदावार भी बेहतर होगी।