ऊना। स्कूल शिक्षा बोर्ड के परीक्षा केंद्रों में सरकार द्वारा लगाए सीसीटीवी भी नकल नहीं रोक पर रहे हैं। स्कूलों में सीसीटीवी लगने के बावजूद उड़नदस्तों ने जिले में 17 छात्रों को नकल करते हुए पकड़ा है। हालांकि स्कूल शिक्षा बोर्ड एवं शिक्षा विभाग की ओर प्रदेश के परीक्षा केंद्रों में नकल रोकने के बड़े-बड़े दावे किए जा रहे हैं।
असल में परीक्षा केंद्रों में लगे सीसीटीवी की फुटेज की जांच सही तरीके से नहीं हो पा रही है। नकलची बिना किसी परवाह के परीक्षों केंद्रों में नकल ले जा रहे हैं। बुधवार को स्कूल शिक्षा बोर्ड की परीक्षा के पहले दिन जमा दो कक्षा के अंग्रेजी विषय की परीक्षा हुई। शिक्षा उपनिदेशक निरीक्षण कमलेश कुमारी की टीम में शामिल नरेश सैणी, सुमन चावला, रमेश चंद, रविंद्र कुमार ने सनोली स्कूल के परीक्षा केंद्र का दौरा किया।
इस दौरान जमा दो कक्षा अंग्रेजी की परीक्षा में पांच छात्रों को नकल करते हुए पकड़ा। इसके अलावा टीम ने शाम के समय एसओएस की परीक्षा में हरोली स्कूल के परीक्षा केंद्र में नौ और टेगौर पब्लिक स्कूल के परीक्षा केंद्र में तीन छात्रों को परीक्षा में नकल करते हुए पकड़ा। इसके अलावा एसडीएम ऊना डॉ. सुरेश जसवाल की टीम में शामिल तहसीलदार विजय राय, रमन कुमार विज, सुभाष चंद, पूनम सैणी ने डीएवी सीसे स्कूल ऊना, बाल एवं कन्या सीसे स्कूल ऊना सहित सीसे स्कूल कुठार कलां, माउंट एवरेस्ट पब्लिक सीसे स्कूल कुठार कलां, नंगड़ा एवं चड़तगढ़ स्कूल के परीक्षा केंद्रों में दबिश दी। प्रारंभिक शिक्षा उपनिदेशक संदीप गुप्ता की टीम ने तलमेहड़ा, धनेत, बंगाणा तथा शाम के समय एसओएस की परीक्षा में ऊना बाल स्कूल के परीक्षा केंद्र में दबिश दी। एसडीएम अंब एस तोरुल रबिश की टीम ने कलरुही और मुबारिकपुर स्कूल के परीक्षा केंद्र जांचे। उच्च शिक्षा उपनिदेशक पीसी राणा की टीम ने धमांदरी, सनराइज पब्लिक स्कूल सलोह, एसडी पब्लिक स्कूल संतोषगढ़ तथा बाल स्कूल संतोषगढ़ एवं शाम के समय एसओएस के पेपर में नैहरियां स्कूल के परीक्षा केंद्र में दबिश दी। शिक्षा उपनिदेशक निरीक्षण कमलेश कुमारी का कहना है कि कई परीक्षा केंद्रों में बोर्ड के नियमों के पालना नहीं की जा रही हैं। उन्होंने कहा कि नियमों की अवहेलना करने वाले स्कूल प्रमुखों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
निजी स्कूलों से डिप्टी सुपरिंटेंडेंट तैनात करने पर सवाल
जिले के कई निजी स्कूलों के परीक्षा केंद्रों में निजी स्कूलों के ही शिक्षक ही डिप्टी सुपरिंटेंडेंट तैनात किए गए हैं। हालांकि शिक्षा विभाग में अनुबंध आधार पर हजारों शिक्षक सेवाएं दे रहे हैं। उन्हें स्कूल शिक्षा बोर्ड की ओर से उड़नदस्तों और परीक्षा केंद्रों में सुपरिंटेंडेंट/डिप्टी सुपरिंटेंडेंट तैनात नहीं किया गया। ऐसे में सवाल यह उठता है कि शिक्षा बोर्ड को सरकारी कर्मचारियों पर कम तो निजी स्कूलों के स्टाफ सदस्यों पर अधिक भरोसा है। बोर्ड परीक्षाओं में निजी स्कूलों के सुपरिंटेंडेंट/डिप्टी सुपरिंटेंडेंट तैनात करने से स्कूल शिक्षा बोर्ड की कार्य प्रणाली पर भी सवाल उठने लगे हैं।