श्रीमद्भागवत कथा के सातवेंं दिन स्वामी अतुल कृष्ण महराज ने किए प्रवचन
संवाद न्यूज एजेंसी
ऊना। भगवती कामाख्या माता की आराधना से हर कार्य सिद्ध हो जाते हैं। कामना रहित कर्म परमात्मा की सर्वोत्तम पूजा है। तपस्या मनुष्य जीवन का यज्ञ एवं सद्भाव ही उसकी हवन सामग्री है।
इस संसार में जो भी महान हुए हैं, उन्होंने सरलता, सच्चाई एवं धैर्य को अपनाया था। यह वचन श्रीमद्भागवत कथा के सातवेंं दिन स्वामी अतुल कृष्ण ने प्राचीन सिद्धपीठ माता श्री कामाख्या देवी मंदिर, पोलियां पुरोहितां अंब में व्यक्त किए। कहा कि हम संसार की प्राप्ति में इतने न आगे बढ़ जाएं कि ईश्वर पीछे छूट जाए। हमें ज्ञान एवं भक्ति की गाड़ी में बैठकर आत्मसुख, परमानंद एवं मुक्ति की मंजिल तक पहुंचना था। पर हम अज्ञान एवं बेवकूफी की ट्रेन में बैठ गए और संसार के बंधन, दुख, चिंता, भय, परेशानी के स्टेशन पर पहुंच गए। हम अपने दिव्य जीवन को ज्ञान की ओर ले जाने का शुभ संकल्प लें। कहा कि मन को ठीक रखो, तन स्वत: ही ठीक हो जाएगा।
सत्य जीवन को बलवान बनाता है। सत्य वह है जो शक्ति ज्ञान एवं पावनता प्रदान करें। इस दौरान कथा में राजा हरिश्चंद्र की कथा तथा सती सावित्री एवं सत्यवान का चरित्र लोगों ने बड़ी श्रद्धा से सुना। इस अवसर पर सैकड़ों श्रोता मौजूद रहे।