ऊना। हिमाचल प्रदेश के इतिहास में पहली मर्तबा कर्मचारियों को वेतन और पेंशन पहली तारीख को न मिलकर सरकार द्वारा पांच और 10 तारीख को जारी करने के फरमान जारी किए गए हैं। इससे प्रदेश के कर्मचारियों और पेंशनरों में रोष है।
इस विषय को लेकर सरकार कहती है कि हम सुरक्षित व्यवस्था प्रबंधन करने की तरफ कदम उठा रहे हैं। यदि समय पर कर्मचारी और पेंशन को अदायगी न हो तो कैसा सुरक्षित व्यवस्था प्रबंध है। इस विषय पर जिला के कुछ कर्मचारियों और पेंशनरों ने अपनी प्रतिक्रिया इस तरह से बयां करते हुए दर्द सुनाया।
कर्मचारी अनामिका शर्मा का कहना है कि कर्मचारियों को भी अपना बजट बनाना होता है और पहली तारीख को ही अदायगी करनी होती हैं, क्योंकि शुरू से ही ऐसा होता आया है। अब समय पर वेतन न मिलने से सभी वस्तुएं गड़बड़ा गई हैं। बच्चों की फीस, घर के खर्चे सभी वेतन पर ही निर्भर हैं। सरकार भविष्य में हमारी दिक्कतों को देखते हुए आगे से हर महीने की पहली तारीख को ही वेतन जारी करने का प्रयास करे।
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कर्मचारी राजेंद्र सिंह का कहना है कि आज तक कभी भी हिमाचल में ऐसा देखने में नहीं आया कि कर्मचारियों को वेतन 5 तारीख के बाद मिले। सरकार को लोकतंत्र में अपनी मनमानी नहीं करनी चाहिए, क्योंकि लोगों द्वारा बनाई गई सरकार है, जिसमें लोगों का हित हो। वहीं, नियम लागू करने चाहिएं, इसलिए वेतन हर माह पहली तारीख को ही मिलना चाहिए।
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पेंशनर करणपाल सिंह का कहना है कि कर्मचारियों को पांच और पेंशनर को 10 तारीख को वेतन और पेंशन देने की सरकार द्वारा अधिसूचना जारी की गई है। पेंशनरों को तो सरकार अरबी के टुकड़े के बराबर ही समझती है। तभी 10 तारीख निश्चित की है। क्या पेंशनर इंसान नहीं है। उनके परिवार उन पर निर्भर हैं। केवल पेंशन से ही गुजारा होता है। शीघ्रअतिशीघ्र सरकार इस पर पुनर्विचार करके हर माह पहली तारीख को पेंशन जारी करें। अन्यथा पेंशनर अगला कदम उठाने के लिए बाध्य होंगे।
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पेंशनर धन्ना सिंह चौधरी का कहना है कि सरकार को हमेशा जन कल्याण का ध्यान रखना चाहिए, क्योंकि बहुत सारे पेंशनर ऐसे हैं। जिनके ऊपर पूरे परिवार का खर्च चलता है। उसी में से बच्चों की फीस भिन्न-भिन्न प्रकार के बिल तथा अन्य खर्च निर्भर हैं। सरकार को आदेश जारी करने से पहले इन बातों पर विचार करना चाहिए। मेरा तो यही कहना है कि सरकार अपने इस फैसले पर पुनर्विचार करके अगले माह पहली तारीख को कर्मचारियों का वेतन और पेंशन जारी करे।
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सेवानिवृत्त कर्मचारी प्रताप सिंह ने बताया कि 4 सितंबर 2024 तक पेंशन न मिलने के कारण आर्थिक तौर से परेशान है। दूध का बिल, दवाई के पैसे, सब्जी वालों के पैसे लोन की किस्तें न देने के कारण अपने आप को असहाय महसूस कर रहा हूं। मैं समझता हूं कि जिस तरह से मैं अपने आप को असहाय समझ रहा हूं। इसी तरह दूसरे पेंशनर्स भी होंगे।
पूर्व उपशिक्षा निदेशक एवं पेंशनर्स वेलफेयर एसोसिएशन ऊना का अध्यक्ष हरमेश सिंह राणा ने कहा कि हिमाचल प्रदेश में पेंशनरों को समय पर पेंशन नहीं मिलने से भारी समस्याएं उत्पन्न हो रही हैं। कई पेंशनर अपनी बुनियादी चीजों की कीमतें चुकता नहीं कर पा रहे हैं। इस स्थिति से उनके जीवन की गुणवत्ता पर नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है। सरकार से तुरंत समाधान की मांग की जा रही है।
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स्कूल प्रवक्ता संघ के प्रदेश वरिष्ठ उपाध्यक्ष विकास रत्न का कहना है कि पहली तारीख को वेतन न आने से ऋण किस्तों की ईएमआई अदा नहीं कर पाए हैं और बच्चों की स्कूल फीस के अलावा अन्य रोजमर्रा की वस्तुओं के बिल रुक गए हैं। सरकार को चाहिए की वेतन और पेंशन यथावत पहले की भांति की पहली तारीख को जारी करके पेंशनरों और कर्मचारियों को राहत प्रदान करे।
प्रताप सिंह ।
प्रताप सिंह ।
प्रताप सिंह ।
प्रताप सिंह ।
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