विद्युत बोर्ड व्यवस्था न बदलने से उपभोक्ता भी समझ नहीं रहे जिम्मेदारी
संवाद न्यूज एजेंसी
नारी (ऊना)। पांच दशक पहले दुनिया को अलविदा कह चुके बिजली उपभोक्ताओं के नाम पर आज भी बिजली मीटर चले रहे हैं। इस प्रक्रिया को न तो विद्युत बोर्ड बदल पाया और न आगे के उपभोक्ता जिम्मेदारी समझ रहे हैं। आमतौर पर नियम है कि किसी की मृत्यु पर 21 दिन के अंदर पंचायत में पंजीकरण तो समय रहते राजस्व के पास जमीन संबंधित इंतकाल दर्ज कराना होता है। लेकिन विद्युत बोर्ड को इन नियमों की कोई परवाह नहीं है। क्षेत्र में कई मामले ऐसे आए हैं, जिसमें मृतकों के नाम से ही बिजली के बिलों का भुगतान हो रहा है, जो कि तर्कसंगत नहीं है।
सवाल यह है कि जो व्यक्ति संसार में नहीं है, वह कैसे बिजली बिल जमा करवाएंगे? इसे व्यवस्था परिवर्तन को लेकर राज्य विद्युत बोर्ड गंभीरता नहीं दिखा रहा। ऊपर से स्थानीय विद्युत उपभोक्ता जिम्मेदारी नहीं समझते हैं। विद्युत बोर्ड भी अपनी बिल राशि के जमा होने तक मतलब रख रहा है। मीटर किसके नाम पर है, यह उनके लिए मायने नहीं रखता। क्षेत्र में 95 प्रतिशत मामलों में चार से पांच दशक पूर्व मृत हो चुके व्यक्तियों के नाम ही बिजली मीटर चल रहे हैं, लेकिन सख्त नियम न होने के कारण उपभोक्ता और विद्युत बोर्ड वर्तमान कार्रवाई से किनारा कर रहे हैं। उपभोक्ता संबंधित अधिकारियों को सूचना तक भी उपलब्ध नहीं करवाते। ऐसे में यदि किसी ने घर बेचना हो या मीटर शिफ्ट करना हो तो समस्या खड़ी हो सकती है। संपत्ति के बंटवारे में भी कई लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
ऐसे होता है मीटर के लिए नाम स्थानांतरित
किसी भी बिजली मीटर उपभोक्ता की मृत्यु होते ही परिवारजन को उपभोक्ता का मृत्यु प्रमाणपत्र एवं नए नाम का शपथ प्रमाणपत्र स्थानीय विद्युत बोर्ड कार्यालय में जमा कराना होता है। सभी दस्तावेज के साथ फाइल जमा होने के बाद बोर्ड नए उपभोक्ता का नाम जारी करता है।
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उपभोक्ताओं के बिजली के बिलों का भुगतान हो रहा है। मृतकों के नाम कनेक्शन चल रहे हैं। इस संबंधी उनके उत्तराधिकारी कार्यालय में आकर एक प्रार्थना पत्र एवं मृत्यु प्रमाणपत्र लगाकर हमें दें, तुरंत कनेक्शन का नाम परिवर्तन कर दिया जाएगा।
-अंकुश कुमार, कनिष्ठ अभियंता, विद्युत बोर्ड