दुलैहड़ (ऊना)। ऊना के अबादा बराना में गंदे पानी की निकासी को लेकर हुए विवाद में दर्ज एससी/एसटी एक्ट के मामले में विशेष न्यायाधीश ऊना की अदालत ने आठ आरोपियों को बरी कर दिया है। अदालत ने माना कि अभियोजन पक्ष आरोपियों पर जातिसूचक शब्दों से अपमानित करने और नाली का पानी रोकने के आरोपों को संदेह से परे साबित नहीं कर पाया। मामले में फैसला दो सितंबर को सुनाया गया।
मामला पांच जुलाई 2021 का है। शिकायतकर्ता पक्ष ने आरोप लगाया था कि अबादा बराना के कुछ लोगों ने नाली को रोक दिया, जिससे कई वार्डों के गंदे पानी की निकासी प्रभावित हुई। आरोप था कि मौके पर जातिसूचक शब्दों का इस्तेमाल कर अपमानित किया गया और पानी की निकासी नहीं होने देने की बात कही गई। शिकायत के आधार पर पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच के बाद अदालत में चालान पेश किया था। अभियोजन पक्ष ने मामले को साबित करने के लिए 20 गवाह पेश किए। अदालत ने पाया कि गवाहों के बयानों में घटना की तारीख, समय, मौके पर मौजूद लोगों और कथित टिप्पणियों को लेकर एकरूपता नहीं थी। एक गवाह ने घटना जून की बताई जबकि मामला पांच जुलाई की घटना के रूप में दर्ज था। एक अन्य गवाह की मौके पर मौजूदगी भी दूसरे बयानों से सच साबित नहीं हुई। अदालत ने जांच के दौरान सामने आए तथ्यों पर भी गौर किया। नाली के नीचे मिट्टी और प्राकृतिक वनस्पति जमा होने से पानी के रुकने की बात सामने आई थी। जांच में यह भी सामने आया कि नाली को खोलने के लिए शिकायतकर्ता पक्ष को रोके जाने का स्पष्ट प्रमाण नहीं मिला। अदालत ने पाया कि पानी की निकासी को लेकर दोनों पक्षों के बीच वर्ष 2018 से विवाद चला आ रहा था। इस संबंध में पहले भी पंचायत और प्रशासन के स्तर पर शिकायतें हुई थीं। समझौते और बाद की कार्रवाई के बावजूद विवाद बना रहा। पानी की निकासी को लेकर सिविल विवाद भी चल रहा था। अदालत ने साक्ष्यों और गवाहों के बयानों का मूल्यांकन करने के बाद कहा कि अभियोजन की कहानी भरोसेमंद और पर्याप्त साक्ष्यों से सच साबित नहीं होती। संदेह का लाभ देते हुए अदालत ने सभी आठ आरोपियों को बरी कर दिया।