ऊना। सूबे के सभी सरकारी स्कूलों में बोर्ड की वार्षिक परीक्षाएं अगले माह बाद मार्च में होने जा रही हैं। सके बावजूद सरकारी स्कूल वार्षिक पारितोषिक वितरण समारोहों में व्यस्त हैं।
सरकार के नियमों के अनुसार स्कूलों में 31 दिसंबर से पहले-पहले ही ऐसे कार्यक्रमों का आयोजन हो जाना चाहिए। इसके बावजूद सरकारी स्कूलों में विद्यालय प्रबंधन नियमों को ताक पर रखकर ऐसे कार्यक्रम आयोजित कर रहा है।
गौरतलब है कि सांस्कृतिक कार्यक्रमों की तैयारी में विद्यार्थियों के कम से कम 15 से 20 दिन पढ़ाई के खराब हो रहे हैं। इस ओर शिक्षा विभाग और स्कूल प्रबंधन ध्यान नहीं दे रहे हैं।
शिक्षा विभाग भी स्कूल प्रबंधनों की इस प्रकार की लापरवाही पर सख्त कदम नहीं उठा रहा है। दूसरी ओर जब से बोर्ड परीक्षा केंद्रों में सीसीटीवी लगे हैं, तब से विद्यार्थियों में बोर्ड परीक्षाओं को लेकर खौफ पैदा हो गया है। बोर्ड परीक्षाओं और कैमरों को लेकर विद्यार्थियों में खौफ को कड़ी मेहनत से पेपरों की तैयारी से खत्म करने की बजाय स्कूल प्रबंधन पढ़ाई के दिनों में ऐसे कार्यक्रम आयोजित कर रहे हैं। इन कार्यक्रमों को लेकर अभिभावक भी स्कूल प्रबंधनों के खिलाफ हैं।
समय न मिलने से हो सकती है देरी : राणा
इस संबंध में उच्च शिक्षा उपनिदेशक पीसी राणा ने कहा कि स्कूलों को निर्देश दिए थे कि वार्षिक समारोह में 31 दिसंबर से पहले करवा लें। मुख्यातिथि के लिए बुलाए मंत्री, विधायक और समाजसेवी लोगों के पास समय न होने से भी कार्यक्रम देरी से करवाने पड़ जाते है। इसका आयोजन एसएमसी और स्कूल अध्यापक की आपसी चर्चा के बाद ही होता है।