फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

सदा नीचे की ओर ही बहता है अधोगामी : अतुल कृष्ण

विज्ञापन
विज्ञापन
संवाद न्यूज एजेंसी
विज्ञापन

ऊना। हमारी चेतना दोनों तरह से बह सकती है। वह अग्नि की तरह ऊर्ध्वगामी हो सकती है या झरनों की तरह अधोगामी। पर्वतों से उतरते हुए झरने या सागर की ओर बहती हुई नदियों से हम परिचित हैं। अधोगामी सदा नीचे की ओर ही बहता है। जहां नीची जगह मिल जाए वहीं उसकी यात्रा है। ये अमृतवचन सलोह कुटिया आश्रम में चल रहे श्रीमद्भागवत कथा के समापन सत्र में अतुल कृष्ण महाराज ने व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि अग्नि की लपटें सदा ही ऊपर की ओर जाती हैं। आकाश की ओर ही दौड़ती हैं। अग्नि को कहीं भी जलाएं। उसे कैसे भी रखें, उसे उलटा भी लटका दें तो भी ज्योति सदा ऊपर की ओर ही दौड़ती है। हम सबकी जीवन यात्रा दोनों तरह से हो सकती है, पानी की तरह भी और अग्नि की तरह भी। साधारणतः हम भी नीचे गड्ढे और गड्ढे खोजते रहते हैं। हमारी चेतना नीचे उतरने को रास्ता पा जाए तो ऊपर की सीढ़ी तत्काल छोड़ देती है। वास्तव में हम जल की तरह यात्रा करते हैं। जबकि होना चाहिए अग्नि की तरह कि जहां जरा सा अवसर मिले, ऊपर बढ़ जाने को तत्पर हो जाएं। इस दौरान बड़ी संख्या में कथा के श्रोताओं के अतिरिक्त प्रमुख रूप से सलोह कुटिया आश्रम के यश गिरी महाराज, रमेश जसवाल, विजय कुमार शर्मा, रामकुमार इत्यादि उपस्थित रहे।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें