ऊना। अच्छे कर्म करते रहना सुखी जीवन की पहली सीढ़ी है। आसक्ति में ही दुख छिपे हुए हैं। मोह के त्याग से अंतः करण की शुद्धि होती है। आत्मज्योति के सदैव प्रदीप्त होते हुए भी मल, विक्षेप एवं आवरण के कारण हम वास्तविक लाभ से वंचित रह जाते हैं। उक्त अमृत वचन शिव महापुराण कथा के पंचम दिवस में अतुल कृष्ण महाराज ने कम्यूनिटी सेंटर ज्वार में व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि हमारा भगवान से नित्य, शाश्वत एवं सनातन संबंध है, जबकि संसार के सारे संबंध मान्यताओं पर आधारित हैं। माने हुए संबंध एक दिन टूट जाएंगे पर प्रभु से हमारे संबंध सदैव एवं अटूट रहेंगे। कथा में भगवान कार्तिकेय का जन्म, तारकासुर का वध, श्रीगणेश जी का प्राकट्य, भगवान शिव द्वारा त्रिपुरासुर का वध, जालंधर दैत्य एवं वृन्दा का प्रसंग, शंखचूड़ एवं तुलसी देवी का वृत्तांत सभी ने श्रद्धा से सुना।