ऊना में आपात कालीन सेवाएं देते डॉक्टर।
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हिमाचल मेडिकल ऑफिसर्स एसोसिएशन के आह्वान पर जिला भर के अस्पतालों में चिकित्सक सामूहिक अवकाश कर हड़ताल पर रहे।
इस दौरान आपातकालीन सेवाएं जारी रही। जिला अस्पताल में भी तमाम चिकित्सक अवकाश होने पर उनके कमरों में ताले जड़े दिखे। डॉक्टरों की मांग है कि प्रदेश सरकार मेडिकेयर हॉस्पिटल सेफ्टी एक्ट लागू करें।
हिमाचल प्रदेश चिकित्सा अधिकारी संघ के जिलाध्यक्ष डॉ. राहुल कतना व महासचिव डॉ. पीयूष नंदा ने कहा कि प्रदेश भर में डॉक्टर सामूहिक अवकाश पर हैं। डॉ. कतना ने कहा कि क्षेत्रीय अस्पताल ऊना में डॉ. दलजीत की जिन परिस्थितियों में मौत हुई है, उसकी न्यायिक जांच होनी चाहिए और दोषियों को गिरफ्तार किया जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि एक माह तक चिकित्सकों का संघर्ष चलेगा। दूसरे चरण में 24 जनवरी से 2 फरवरी तक काले बिल्ले लगाए जाएंगे। जबकि 3 से 12 फरवरी तक रोजाना 9 से 12 बजे तक पेन डाउन हड़ताल करेंगे। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार ने यदि इसके बाद भी मांग को स्वीकार न किया, तो 13 फरवरी से प्रदेश के सभी चिकित्सक सामूहिक छुट्टी पर जाएंगे और 24 फरवरी को सामूहिक त्याग पत्र दिए जाएंगे।
उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार की लेटलतीफी के चलते डॉक्टरों, अस्पताल के स्टाफ को आए दिन लड़ाई झगड़ों का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि यदि सरकार ने कानून बनाकर लागू किया होता, तो अस्पताल में होनी वाली हिंसा को रोका जा सकता है। उन्होंने कहा कि डॉक्टर, पैरामेडिकल स्टाफ, नर्सिज पूरी मेहनत के साथ काम करते हुए रोगियों के स्वास्थ्य को बेहतर बनाने के लिए काम कर रहे हैं। लेकिन आए दिनों अस्पताल में चिकित्सकों व स्टाफ के साथ लोगों द्वारा अभद्र व्यवहार किए जाने के मामलों में बढ़ोतरी हो रही है, जिसे सरकार को गंभीरता से लेना चाहिए।